ब्रेकिंग
Bihar MLC Election 2026 : अनंत सिंह की बगावत के बाद एक्शन में नीतीश कुमार, नीरज की जीत के लिए चला 'अमोघ अस्त्र'! ललन सिंह से मुलाकात के बाद क्या बदलेगा खेल?अनंत-नीरज की लड़ाई में क्यों चुप हैं नीतीश कुमार? ‘पंच परमेश्वर’ बनने से क्यों बच रहे JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष, कहीं यह सोची-समझी रणनीति तो नहीं?Bihar News : डायल-112 टीम पर हमला पड़ेगा महंगा, थानेदार पर होगी कार्रवाई; बिहार पुलिस मुख्यालय का सख्त आदेशBihar News : ‘पार्टी में बर्तन बजते रहते हैं’, अनंत-नीरज विवाद पर संजय झा ने संभाला मोर्चा; ललन सिंह को लेकर भी दिया जवाबBihar News: बिहार में 5 साल में लगेंगे 10 हजार उद्योग, CM सम्राट ने बताया बड़ा लक्ष्यBihar MLC Election 2026 : अनंत सिंह की बगावत के बाद एक्शन में नीतीश कुमार, नीरज की जीत के लिए चला 'अमोघ अस्त्र'! ललन सिंह से मुलाकात के बाद क्या बदलेगा खेल?अनंत-नीरज की लड़ाई में क्यों चुप हैं नीतीश कुमार? ‘पंच परमेश्वर’ बनने से क्यों बच रहे JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष, कहीं यह सोची-समझी रणनीति तो नहीं?Bihar News : डायल-112 टीम पर हमला पड़ेगा महंगा, थानेदार पर होगी कार्रवाई; बिहार पुलिस मुख्यालय का सख्त आदेशBihar News : ‘पार्टी में बर्तन बजते रहते हैं’, अनंत-नीरज विवाद पर संजय झा ने संभाला मोर्चा; ललन सिंह को लेकर भी दिया जवाबBihar News: बिहार में 5 साल में लगेंगे 10 हजार उद्योग, CM सम्राट ने बताया बड़ा लक्ष्य

पेड़ से बंधी बहन, बचाने गए भाई की कर दी हत्या; 35 साल बाद कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, 5 को उम्रकैद

Bihar Crime News: मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाना क्षेत्र के शिवराहां चतुर्भुज गांव में 35 साल पहले हुए चर्चित हत्याकांड में आखिरकार अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास

पेड़ से बंधी बहन, बचाने गए भाई की कर दी हत्या; 35 साल बाद कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, 5 को उम्रकैद
Tejpratap
Tejpratap
5 मिनट

Bihar Crime News: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में तीन दशक से अधिक पुराने एक सनसनीखेज हत्याकांड में आखिरकार अदालत ने फैसला सुना दिया है। अहियापुर थाना क्षेत्र के शिवराहां चतुर्भुज गांव में 35 वर्ष पहले हुई इस घटना में पांच लोगों को दोषी करार देते हुए अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश (पंचम) आलोक कुमार पांडेय की अदालत ने सुनाया। दोषियों पर 50–50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर उन्हें दो-दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।


सजा पाने वालों में शिवराहां चतुर्भुज गांव के बैद्यनाथ राय, रामबलम राय, महंत राय, रामचंद्र पासवान और सहदेव राय शामिल हैं। इस मामले में एक अन्य आरोपित लखी राय को अदालत ने पहले ही साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था। फैसले के समय कोर्ट परिसर में गांव के कई लोग और दोनों पक्षों के परिजन बड़ी संख्या में मौजूद थे।


यह मामला नौ अगस्त 1991 की सुबह की घटना से जुड़ा है। उस समय शिवराहां चतुर्भुज गांव के मोहन राय ने अहियापुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने अपने बयान में बताया था कि उस दिन सुबह करीब आठ बजे बैद्यनाथ राय और उसके सहयोगी उनकी जमीन पर कब्जा करने की नीयत से ट्रैक्टर से जोताई कर रहे थे। इस दौरान जब उनकी मां बसंती देवी ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने उन्हें पकड़कर पेड़ से बांध दिया और उनके साथ बदसलूकी की।


मां को इस हालत में देख उनके मामा कुंवर राय उन्हें छुड़ाने के लिए मौके पर पहुंचे। आरोप है कि इसी दौरान बैद्यनाथ राय ने अपनी लाइसेंसी बंदूक से कुंवर राय पर गोली चला दी। गोली लगने से वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद आरोपियों ने लाठी-डंडों से भी उनकी पिटाई की। गंभीर हालत में उन्हें इलाज के लिए श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसकेएमसीएच) ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।


घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। लगभग तीन वर्षों की जांच के बाद छह जुलाई 1994 को पुलिस ने बैद्यनाथ राय समेत अन्य आरोपितों के खिलाफ गैरइरादतन हत्या की धारा में चार्जशीट दाखिल की थी। बाद में केस डायरी में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने वर्ष 2009 में मामले में हत्या की धारा जोड़ते हुए संज्ञान लिया। इसके दो साल बाद 16 अप्रैल 2011 से अदालत में गवाही की प्रक्रिया शुरू हुई।


अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक सुनील कुमार पांडेय ने अदालत में कुल 11 गवाहों को पेश किया। हालांकि इनमें से चार गवाह बाद में पक्षद्रोही हो गए। इसके बावजूद शेष गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सुनवाई जारी रखी। करीब 11 वर्षों तक गवाही की प्रक्रिया चलती रही। इसके बाद आठ दिसंबर 2022 से मामले में अंतिम बहस शुरू हुई थी।


अपर लोक अभियोजक ने यह भी बताया कि मामले की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छेड़छाड़ की बात सामने आई थी, जिसके कारण मुकदमे की सुनवाई में कई बार बाधाएं आईं। इसके बावजूद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपितों को दोषी ठहराया।


मामले के सूचक मोहन राय ने फैसले के बाद कहा कि आरोपित लोग इलाके के दबंग थे और लंबे समय तक उनके परिवार को मुकदमा वापस लेने के लिए धमकाया जाता रहा। उन्होंने बताया कि पिछले 35 वर्षों से उनका परिवार डर और तनाव के माहौल में जीवन बिता रहा था।


फैसला सुनाए जाने के बाद मोहन राय भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि इतने वर्षों बाद अदालत से न्याय मिलने से उनके परिवार को राहत मिली है। उन्होंने उस दर्दनाक घटना को याद करते हुए कहा कि आज भी उस दिन की याद से रोंगटे खड़े हो जाते हैं, लेकिन अब उन्हें लगता है कि आखिरकार न्याय मिला है।