1st Bihar Published by: First Bihar Updated Fri, 06 Feb 2026 01:45:01 PM IST
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Police Clash : मुजफ्फरपुर जिले के पियर थाना क्षेत्र का बड़गांव इलाका शुक्रवार को रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। नियमित वाहन चेकिंग के दौरान शुरू हुआ एक मामूली विवाद अब एक बड़े बवाल का रूप ले चुका है। पुलिस और स्थानीय ग्रामीणों के बीच हुई तीखी झड़प और पत्थरबाजी के कारण पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल व्याप्त है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है।
विवाद की जड़: सरपंच और पुलिस के बीच तकरार
घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब पियर थाना की पुलिस बड़गांव में नियमित वाहन चेकिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान पुलिस ने एक युवक को पकड़ा और उससे पूछताछ शुरू की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्थानीय सरपंच लाल बाबू सहनी ने इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया। सरपंच का तर्क था कि स्थानीय स्तर पर चेकिंग से विधि-व्यवस्था की समस्या हो सकती है, इसलिए उन्होंने युवक को छोड़ने और वहां चेकिंग न करने का दबाव बनाया। देखते ही देखते बहस मारपीट में बदल गई। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने सरपंच लाल बाबू सहनी की बीच सड़क पर पिटाई कर दी।
ग्रामीणों का आक्रोश और सड़क जाम
सरपंच की पिटाई की खबर आग की तरह पूरे गांव में फैल गई। आक्रोशित होकर भारी संख्या में महिलाएं, बच्चे और नौजवान सड़कों पर उतर आए। ग्रामीणों ने पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मुख्य सड़क को अवरुद्ध कर दिया। पुलिस और भीड़ के बीच हुई इस झड़प में स्थिति काफी गंभीर हो गई, जिसके बाद पुलिस को पीछे हटना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले में पुलिस के तरफ से फायरिंग भी कि गई है। हालांकि, वरीय पुलिस कप्तान ने इस बात की पुष्टि नहीं कि है।
प्रशासनिक सक्रियता और जाँच
मामले की गंभीरता को देखते हुए सकरा के एसडीपीओ (SDPO) मनोज कुमार सिंह अतिरिक्त पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित भीड़ को समझाने का प्रयास किया और आश्वासन दिया कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी।
एसएसपी का सख्त रुख
मुजफ्फरपुर के एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने इस घटना पर कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में सरकारी कार्य में बाधा डालना स्वीकार्य नहीं है। एसएसपी ने कहा, "हमें जानकारी मिली है कि एक जनप्रतिनिधि ने विधि-व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास किया। मामले की गहन जांच के आदेश दिए गए हैं। यदि सरकारी काम में रुकावट पाई गई, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।" साथ ही, उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि यदि जांच में कोई पुलिसकर्मी दोषी पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध भी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।