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बिहार में साइबर अपराध की घटनाएं बढ़ीं, बुजुर्ग दंपति को 17 दिनों तक किया ‘डिजिटल अरेस्ट’, करीब 19 लाख की ठगी

Bihar Cyber Crime: मुजफ्फरपुर में साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें रिटायर्ड कर्मचारी और उनकी पत्नी को 17 दिनों तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखकर 18.85 लाख रुपये की ठगी कर...

बिहार में साइबर अपराध की घटनाएं बढ़ीं, बुजुर्ग दंपति को 17 दिनों तक किया ‘डिजिटल अरेस्ट’, करीब 19 लाख की ठगी
Ramakant kumar
4 मिनट

Bihar Cyber Crime: बिहार के मुजफ्फरपुर से सामने आई साइबर ठगी की यह घटना किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं, लेकिन हकीकत इतनी खौफनाक है कि सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। भगवानपुर इलाके में रहने वाले रिटायर कर्मचारी हरेंद्र कुमार और उनकी पत्नी कांति देवी को साइबर अपराधियों ने पूरे 17 दिनों तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखकर 18.85 लाख रुपये ठग लिए।


इस पूरे मामले की शुरुआत 26 मार्च की शाम करीब साढ़े चार बजे हुई, जब हरेंद्र कुमार को एक व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को एंटी टेरेरिस्ट स्क्वैड (ATS) का अधिकारी बताया और बेहद सख्त लहजे में बातचीत शुरू की। उसने हरेंद्र कुमार का आधार नंबर बताते हुए आरोप लगाया कि उनके नाम पर निकाले गए सिम कार्ड और बैंक खाते का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों में किया गया है।


यह सुनते ही दंपती के पैरों तले जमीन खिसक गई। इसके बाद शुरू हुआ 17 दिनों तक चलने वाला मानसिक उत्पीड़न का खतरनाक खेल। साइबर शातिरों ने उन्हें लगातार कॉल पर बनाए रखा। स्थिति इतनी भयावह थी कि दोनों पति-पत्नी को दिन-रात फोन पर ही रहने के लिए मजबूर कर दिया गया। वे ठीक से सो भी नहीं पाते थे, मुश्किल से एक-दो घंटे ही आराम मिल पाता था।


शातिरों ने उन्हें इतना डरा दिया कि वे किसी और से खुलकर बात भी नहीं कर पा रहे थे। अगर कोई रिश्तेदार कॉल करता, तो उन्हें सिर्फ हाल-चाल तक सीमित रहने को कहा जाता था। अपराधियों ने वीडियो कॉल के जरिए खुद को अधिकारी जैसा दिखाने की कोशिश भी की, ताकि भरोसा और डर दोनों बनाए रखा जा सके।


धीरे-धीरे ठगों ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि अगर वे “जांच में सहयोग” नहीं करेंगे, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इसके बाद उन्होंने एक और चाल चली। उन्होंने हरेंद्र कुमार से एक आवेदन लिखवाया, जिसमें यह दर्शाया गया कि वे जांच में सहयोग कर रहे हैं और उन्हें माफी दी जाए।


फिर आया असली खेल—पैसों का। शातिरों ने कहा कि रिजर्व बैंक के निर्देशानुसार केस से राहत पाने के लिए उन्हें कुछ रकम निर्दिष्ट खातों में ट्रांसफर करनी होगी। डर के मारे हरेंद्र कुमार बैंक पहुंचे और अलग-अलग खातों में पैसे भेजने लगे।


30 मार्च को उन्होंने केरल के कोच्चि स्थित एक कंपनी के खाते में 5.60 लाख रुपये ट्रांसफर किए। इसके बाद 2 अप्रैल को फिर से उन्हें कॉल पर रखते हुए बैंक ले जाया गया, जहां मुंबई और कर्नाटक के अलग-अलग खातों में 7.10 लाख और 6.15 लाख रुपये भेजवाए गए। इस तरह कुल 18.85 लाख रुपये ठगों के खातों में पहुंच गए।


इतना सब होने के बाद भी शातिरों का लालच खत्म नहीं हुआ। उन्होंने और पैसों की मांग शुरू कर दी। यहीं से हरेंद्र कुमार को शक हुआ कि वे किसी बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार हो चुके हैं। उन्होंने हिम्मत जुटाकर कॉल काटा और अपने रिश्तेदारों से संपर्क किया। इसके बाद नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई।


इस घटना ने दंपती को अंदर तक झकझोर दिया। हरेंद्र कुमार ने बताया कि इन 17 दिनों के दौरान उन्हें हमेशा डर बना रहा कि कहीं उनके साथ कुछ अनहोनी न हो जाए। साइबर अपराधियों के पास उनके पूरे परिवार की जानकारी थी, जिससे डर और भी बढ़ गया था।


घटना के बाद जब उन्होंने अपने बेटों को पूरी बात बताई, तो उन्होंने माता-पिता को संभाला और हिम्मत दी। बेटों ने साफ कहा कि पैसा फिर आ सकता है, लेकिन जिंदगी और हिम्मत सबसे जरूरी है।


फिलहाल पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है और जांच शुरू कर दी गई है। बैंक खातों और ट्रांजेक्शन की जानकारी खंगाली जा रही है। शुरुआती जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि ठगों ने फर्जी कंपनियों के नाम पर म्यूल अकाउंट खोलकर इस ठगी को अंजाम दिया।

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Ramakant kumar

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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