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जनगणना कर्मियों को ग्रामीणों ने चोर समझकर खदेड़ा, रात में सर्वे करना पड़ गया महंगा

पूर्वी चंपारण के पकड़ीदयाल प्रखंड में देर रात जनगणना कार्य करने पहुंचे कर्मियों को ग्रामीणों ने संदिग्ध समझकर खदेड़ दिया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ।

बिहार न्यूज
रात में सर्वेक्षण से फैला भ्रम
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

EAST CHAMPARAN:बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में रात में जनगणना के दौरान एक अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो गई। देर रात सर्वे करने पहुंचे जनगणना कर्मियों को ग्रामीणों ने चोर समझकर शोर मचाया और गांव से खदेड़ दिया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि कर्मियों को किसी तरह वहां से भागकर अपनी जान बचानी पड़ी। बाद में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ।


मामला पकड़ीदयाल प्रखंड की सिरहा पंचायत के वार्ड संख्या-5 स्थित हसनाबाद गांव की है। बताया जाता है कि अपने साथियों की लापरवाही के कारण अतिरिक्त जनगणना कर्मियों को अंतिम समय में सर्वेक्षण कार्य पूरा करने के लिए लगाया गया था। रविवार को रात करीब 10 बजे जनगणना कर्मियों का एक दल मोबाइल और टॉर्च की रोशनी के सहारे गांव में पहुंचा। वे घर-घर जाकर लोगों से जानकारी एकत्र कर रहे थे। अधिकांश ग्रामीण मजदूरी पेशा से जुड़े हैं और रात में जल्दी सो जाते हैं। ऐसे में अंधेरे में अचानक अजनबी लोगों को घरों के आसपास घूमते और लोगों को जगाते देख ग्रामीणों को संदेह हो गया।


ग्रामीणों ने बताया कि रात के समय टॉर्च जलाकर जानकारी लेने पहुंचे कर्मियों को देखकर लोगों ने उन्हें चोर समझ लिया। कुछ लोगों ने शोर मचा दिया, जिसके बाद गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। एक युवक ने तो यहां तक कह दिया कि ये लोग जनगणना करने आए हैं या डकैती करने। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ जनगणना कर्मियों ने जानकारी नहीं देने पर प्रधानमंत्री आवास योजना, राशन कार्ड और अन्य सरकारी सुविधाओं से वंचित होने की चेतावनी दी। इससे लोगों में और नाराजगी बढ़ गई।


ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि जब जनगणना की निर्धारित अवधि 2 मई से 31 मई तक थी, तो अंतिम दिन रात के समय इतने बड़े इलाके का सर्वेक्षण कैसे किया जा सकता है। उनका आरोप है कि केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए जल्दबाजी में काम किया गया, इसके बावजूद कई मकानों का सर्वेक्षण नहीं हो पाया। अतिरिक्त जनगणना कर्मी राजेश कुमार ने बताया कि यह क्षेत्र पहले से शुभम कुमार और सुरेश प्रसाद को आवंटित था। उनके स्तर पर सर्वेक्षण कार्य समय पर पूरा नहीं होने के कारण अतिरिक्त कर्मियों को लगाया गया था। उन्होंने बताया कि बस्ती में करीब 150 से अधिक मकान हैं और निर्धारित समय सीमा के भीतर सर्वेक्षण पूरा करने के लिए रात 12 बजे तक कार्य किया गया।


मामले पर पकड़ीदयाल की बीडीओ स्वर्ण वर्षा ने बताया कि जनगणना कार्य की समय-सीमा 31 मई की रात 12 बजे तक निर्धारित थी। कुछ घरों का सर्वेक्षण शेष रह गया था, इसलिए कर्मियों को देर रात तक कार्य करना पड़ा। रात के समय सर्वेक्षण किए जाने से ग्रामीणों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई। उन्होंने बताया कि स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों द्वारा लोगों को समझाने के बाद स्थिति सामान्य हो गई और मामला शांतिपूर्वक सुलझा लिया गया।








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