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रिटायर्ड अंडर सेक्रेटरी की करोड़ों की जमीन में बड़ा खेल, MLA के करीबी के नाम पर फर्जी म्यूटेशन, पुलिस ने CO को भेजा नोटिस

मुजफ्फरपुर में रिटायर अवर सचिव की करीब 15 करोड़ रुपये की 70 डिसमिल पैतृक जमीन के फर्जी केवाला और दाखिल-खारिज का मामला सामने आया है। पुलिस ने सीओ को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। वहीं, MLA के भाई के नाम हुए दाखिल-खारिज को रद्द किया जा रहा है।

Bihar News
प्रतिकात्मक तस्वीर
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Mukesh Srivastava
4 मिनट

Bihar News: बिहार के मुजफ्फरपुर में सेवानिवृत्त अवर सचिव विजय कुमार की करीब 15 करोड़ रुपये की पैतृक जमीन के फर्जी केवाला के आधार पर दाखिल-खारिज किए जाने का मामला सामने आया है। इस मामले में बेलसंड के लोजपा (रामविलास) विधायक अमित रानू से जुड़े लोगों का नाम भी सामने आया है। पुलिस ने कथित तौर पर गलत तरीके से जमीन का म्यूटेशन करने के मामले में मुशहरी अंचलाधिकारी महेंद्र शुक्ला को नोटिस भेजकर उनका पक्ष मांगा है। नोटिस मिलने के बाद सीओ के छुट्टी पर चले जाने की बात सामने आई है।



मामला अहियापुर थाना क्षेत्र के सहबाजपुर सलेम गांव का है। आरोप है कि निवासी विजय कुमार की पैतृक 70 डिसमिल जमीन का फर्जी केवाला हाजीपुर के सलेमपुर किशुनदास निवासी कृष्णनंदन पासवान के नाम तैयार किया गया। इसी के आधार पर मुशहरी सीओ ने कृष्णनंदन के नाम 70 डिसमिल जमीन का दाखिल-खारिज कर दिया था।



मामला सामने आने के बाद डीसीएलआर पूर्वी ने कृष्णनंदन पासवान के नाम किए गए दाखिल-खारिज को निरस्त कर दिया। इसी विवादित जमाबंदी से बाद में विधायक के भाई अभिनव, तुषार सिंह और अरविंद कुमार मेहता के नाम भी जमीन का दाखिल-खारिज किए जाने का मामला सामने आया है। अब इन तीनों के नाम हुए दाखिल-खारिज को निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।



पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि जब कृष्णनंदन के नाम फर्जी केवाला और उससे संबंधित दाखिल-खारिज का मामला सामने आ चुका था, तो उसी जमाबंदी से विधायक के भाई और अन्य लोगों के नाम पर दोबारा दाखिल-खारिज किस आधार पर किया गया। इस मामले के जांच अधिकारी विष्णु पांडेय ने मुशहरी सीओ को नोटिस भेजकर अपना पक्ष रखने को कहा है। आईओ के अनुसार, वह सीओ से पूछताछ के लिए अंचल कार्यालय पहुंचे थे, लेकिन सीओ के छुट्टी पर होने के कारण उनसे मुलाकात नहीं हो सकी।



इधर, जमीन कब्जे से जुड़े सात मामलों में बेलसंड विधायक के भाई सोनू सिंह को अदालत से फिलहाल राहत मिली है। उन्होंने इन सभी मामलों में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की थी। सुनवाई के बाद अदालत ने फिलहाल उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया है, जिससे उनकी गिरफ्तारी पर तत्काल रोक लग गई है।



सभी सात अग्रिम जमानत अर्जियों को एडीजे-20 के न्यायालय में स्थानांतरित किया गया है, जहां 14 सितंबर को अगली सुनवाई होनी है। ये सातों प्राथमिकी 23 अगस्त को अहियापुर थाने में दर्ज कराई गई थीं। कमलेश कुमार, सरोज कुमार, रोशन कुमार, पिंकी कुमारी, राजा कुमार, अभिषेक यादव और अमित कुमार ने अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कराई थी।



प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि झपहां में जमीन पर जबरन कब्जा करने के लिए सोनू सिंह 50 से अधिक लोगों के साथ पहुंचे और जेसीबी से निर्माणाधीन मकान और बाउंड्री को ध्वस्त कर दिया। शिकायतकर्ताओं ने अपनी पुश्तैनी जमीन पर जबरन कब्जे की कोशिश और विरोध करने पर धमकी देने का आरोप लगाया है। इस मामले में पुलिस ने तुषार सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जेल में बंद तुषार सिंह की जमानत अर्जी पर एडीजे-8 के न्यायालय में सुनवाई हुई, जिसकी अगली तारीख 15 सितंबर तय की गई है।



फिलहाल विधायक के भाई से जुड़े दाखिल-खारिज विवाद और जमीन कब्जे के मामलों की अहियापुर पुलिस जांच कर रही है। सोनू सिंह के खिलाफ सात मामलों में अदालत के अंतरिम आदेश के कारण फिलहाल गिरफ्तारी की कार्रवाई पर रोक है। पुलिस अब 14 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता