ब्रेकिंग
पटना हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: अनुकंपा पर बहाल शिक्षकों को मिलेगा नियमित वेतनमान, शिक्षा विभाग को 3 महीने का समयशराबबंदी वाले राज्य में 75 लाख की शराब बरामद, राजस्थान का ड्राइवर गिरफ्तारबर्थ सर्टिफिकेट बनाने दो साल की देरी पड़ेगी भारी, लगाने पड़ सकते हैं कोर्ट के चक्कर; संसद से नया बिल पासगोपालगंज में 10 रुपये के लिए महिला की हत्या, 6 आरोपी गिरफ्तारपप्पू यादव के खिलाफ प्रयागराज कोर्ट में मुकदमा, 11 अगस्त को पेश होने का आदेश; क्या है मामला?पटना हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: अनुकंपा पर बहाल शिक्षकों को मिलेगा नियमित वेतनमान, शिक्षा विभाग को 3 महीने का समयशराबबंदी वाले राज्य में 75 लाख की शराब बरामद, राजस्थान का ड्राइवर गिरफ्तारबर्थ सर्टिफिकेट बनाने दो साल की देरी पड़ेगी भारी, लगाने पड़ सकते हैं कोर्ट के चक्कर; संसद से नया बिल पासगोपालगंज में 10 रुपये के लिए महिला की हत्या, 6 आरोपी गिरफ्तारपप्पू यादव के खिलाफ प्रयागराज कोर्ट में मुकदमा, 11 अगस्त को पेश होने का आदेश; क्या है मामला?

मधुबनी की सकरी और रैयाम चीनी मिलें होंगी चालू, 20 नवंबर को पीएम मोदी रखेंगे आधारशिला

मधुबनी की 1997 से बंद पड़ी सकरी और रैयाम चीनी मिलों को जल्द चालू किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 नवंबर को पुनरुद्धार परियोजना की आधारशिला रखेंगे, जिससे किसानों और मजदूरों को रोजगार की नई उम्मीद मिलेगी।

बिहार न्यूज
दो बंद चीनी मिलें होगी चालू
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

MADHUBANI: लंबे समय से बंद पड़ी मधुबनी जिले की सकरी और रैयाम चीनी मिलों को जल्द चालू किए जाने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रस्तावित योजना के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 नवंबर को इन चीनी मिलों के पुनरुद्धार की आधारशिला रखेंगे। इस घोषणा के बाद क्षेत्र के किसानों, मजदूरों और बेरोजगार युवाओं में नई उम्मीद जगी है।


सकरी चीनी मिल में काम शुरू होने की संभावना को लेकर वर्षों से इंतजार कर रहे मजदूर और किसान उत्साहित नजर आ रहे हैं।


1933 में हुई थी सकरी चीनी मिल की स्थापना

ऐतिहासिक रूप से सकरी चीनी मिल की स्थापना 1933 में दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह ने अंग्रेजी शासनकाल के दौरान कराई थी। सकरी और रैयाम चीनी मिल के संचालन से इस पूरे क्षेत्र के गन्ना किसानों को नकदी फसल का बड़ा बाजार मिला था और हजारों परिवारों की आजीविका इन मिलों पर निर्भर थी।


चीनी मिलें किसानों के लिए आय का प्रमुख स्रोत थीं, जबकि मजदूरों के लिए रोजगार का बड़ा आधार। इन मिलों के बंद होने के बाद क्षेत्र में बेरोजगारी बढ़ी और बड़ी संख्या में लोगों का पलायन शुरू हुआ।


मिल चालू कराने को लेकर वर्षों तक चला आंदोलन

बंद पड़ी चीनी मिलों को चालू कराने की मांग लंबे समय से उठती रही है। किसान हिंद मजदूर यूनियन के नेता अघनु यादव ने दशकों तक मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को पत्र लिखकर तथा विभिन्न आंदोलनों के माध्यम से मिलों के पुनरुद्धार और मजदूरों के बकाया भुगतान की मांग उठाई।


उन्होंने लगातार यह मुद्दा उठाया कि चीनी मिलों के पुनः संचालन से किसानों, मजदूरों और स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा तथा क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।


1997 से बंद हैं दोनों चीनी मिलें

एनडीए सरकार ने क्षेत्र से बेरोजगारों के पलायन को रोकने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के उद्देश्य से 1997 से बंद पड़ी सकरी और रैयाम चीनी मिलों को पुनः चालू करने की घोषणा की थी। अब इस दिशा में औपचारिक प्रक्रिया तेज हो गई है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 20 नवंबर को आधारशिला रखने की संभावना जताई जा रही है।


विधायक माधव आनंद ने जताई खुशी

इस संबंध में विधायक माधव आनंद ने कहा कि उन्होंने अपने चुनावी घोषणा पत्र में सकरी और रैयाम चीनी मिलों को चालू कराने का वादा किया था और अब उस वादे को पूरा करने की दिशा में ठोस पहल की जा रही है। उन्होंने कहा कि चीनी मिलों के पुनः संचालन से किसानों को गन्ने का बेहतर बाजार मिलेगा, स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे और क्षेत्र के आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।

टैग्स