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गोली मारने के मामले में पूर्व मुखिया को 10 साल की सजा, पीड़ित ने आर्म्स लाइसेंस व पासपोर्ट रद्द करने की भी उठाई मांग

मधुबनी के सकरी थाना क्षेत्र के चर्चित 2018 फायरिंग मामले में पूर्व मुखिया अली अहमद उर्फ मुन्ना बॉस को अदालत ने 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। फैसले के बाद पीड़ित उमर महमूद ने दोषी का आर्म्स लाइसेंस और पासपोर्ट रद्द करने की मांग की।

बिहार न्यूज
मुन्ना बॉस को कोर्ट ने सुनाई सजा
© AI-generated image
Jitendra Vidyarthi
2 मिनट

मधुबनी: वर्ष 2018 के चर्चित फायरिंग मामले में मधुबनी के सकरी पश्चिमी पंचायत के पूर्व मुखिया अली अहमद उर्फ मुन्ना बॉस को अदालत ने 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। फैसले के बाद पीड़ित उमर महमूद ने प्रशासन से दोषी का आर्म्स लाइसेंस और पासपोर्ट तत्काल रद्द करने की मांग की है। 


मामला मधुबनी के सकरी थाना क्षेत्र के सकरी पश्चिमी पंचायत से जुड़ा है जहां  के पूर्व मुखिया अली अहमद उर्फ मुन्ना बॉस को वर्ष 2018 के चर्चित फायरिंग मामले में अदालत ने दोषी ठहराने के बाद 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश पवन कुमार पांडेय की अदालत ने भारतीय दंड संहिता एवं आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं में यह फैसला सुनाया।


मामले के पीड़ित उमर महमूद ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से दोषी का आर्म्स लाइसेंस तथा पासपोर्ट रद्द करने की मांग की है। उनका कहना है कि दोषसिद्धि के बाद दोषी के पास हथियार रखने का कोई औचित्य नहीं रह जाता और पासपोर्ट भी निरस्त किया जाना चाहिए।


गौरतलब है कि 17 सितंबर 2018 को सकरी में हुई फायरिंग की घटना में उमर महमूद के हाथ में गोली लगी थी। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी के घर से पिस्टल और राइफल भी बरामद की थी। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए न्यायिक हिरासत में भेज दिया था और अब उसे 10 वर्ष की सजा सुनाई गई है।


पीड़ित ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और अदालत के फैसले से न्याय मिला है। साथ ही उन्होंने प्रशासन से दोषी के हथियार लाइसेंस और पासपोर्ट को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की कार्रवाई करने की अपील की है।

मधुबनी से कुमार गौरव की रिपोर्ट

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