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BIHAR NEWS : शिक्षा व्यवस्था की शर्मनाक तस्वीर! ढाई सौ बच्चे फूस की छत के नीचे पढ़ने को मजबूर

मधुबनी के बासोपट्टी प्रखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय मैरवा में करीब 250 बच्चे फूस की छत के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। स्कूल में भवन और कमरों की भारी कमी से पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

BIHAR NEWS : शिक्षा व्यवस्था की शर्मनाक तस्वीर! ढाई सौ बच्चे फूस की छत के नीचे पढ़ने को मजबूर
Tejpratap
Tejpratap
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BIHAR NEWS : बिहार में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के दावे किए जाते हैं, लेकिन मधुबनी जिले से सामने आई एक तस्वीर इन दावों की हकीकत पर सवाल खड़े कर रही है। जिले के बासोपट्टी प्रखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय मैरवा में करीब ढाई सौ बच्चे लंबे समय से फूस की छत के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर हैं। विद्यालय में पर्याप्त भवन और कमरों की व्यवस्था नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

विद्यालय की स्थिति ऐसी है कि परिसर में मौजूद पक्के भवन में महज दो कमरे हैं। इनमें से एक कमरे में विद्यालय का कार्यालय संचालित होता है, जबकि दूसरे कमरे का उपयोग मिड डे मील से संबंधित सामग्री रखने के लिए किया जाता है। ऐसे में विद्यालय में नामांकित करीब 250 बच्चों के लिए कक्षाएं संचालित करने की कोई पर्याप्त व्यवस्था नहीं बचती है।

फलस्वरूप बच्चों को मजबूरी में फूस की छत के नीचे बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। गर्मी, बारिश और खराब मौसम के दौरान बच्चों और शिक्षकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बारिश होने पर पढ़ाई बाधित हो जाती है और बच्चों को सुरक्षित स्थान पर जाने की चिंता सताने लगती है।

पढ़ाई के लिए जगह की भारी कमी

विद्यालय में छात्रों की संख्या अधिक है, लेकिन उसके अनुपात में कक्षाओं की व्यवस्था नहीं है। एक ओर सरकार सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर प्राथमिक विद्यालय मैरवा में बुनियादी सुविधाओं की कमी बच्चों के भविष्य पर असर डाल रही है।

विद्यालय में पर्याप्त कमरे नहीं होने के कारण अलग-अलग कक्षाओं का नियमित संचालन भी चुनौती बना हुआ है। फूस के नीचे पढ़ाई कर रहे बच्चों के लिए न तो मौसम से बचाव की स्थायी व्यवस्था है और न ही एक सुरक्षित और सुविधाजनक शैक्षणिक वातावरण।

स्कूल के पास जमीन, फिर भी नहीं बन रहा भवन

विद्यालय के शिक्षकों का कहना है कि स्कूल के पास अपनी जमीन उपलब्ध है। इस जमीन पर नए भवन और अतिरिक्त कमरों का निर्माण कराया जा सकता है। शिक्षकों के अनुसार, भवन निर्माण की मांग को लेकर कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों से आग्रह किया जा चुका है।

विद्यालय की समस्या से विभागीय अधिकारियों को अवगत कराए जाने के बावजूद अब तक नए भवन निर्माण को लेकर कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। शिक्षकों का कहना है कि यदि विद्यालय की उपलब्ध जमीन पर भवन का निर्माण हो जाए तो बच्चों को फूस की छत के नीचे पढ़ने की मजबूरी से मुक्ति मिल सकती है। फूस की छत के नीचे पढ़ाई करने वाले बच्चों के लिए बारिश का मौसम सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। खराब मौसम के दौरान कक्षा संचालन प्रभावित होता है। बारिश और तेज हवा के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब ढाई सौ बच्चों वाले विद्यालय में इस तरह की व्यवस्था शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। बच्चों को सुरक्षित भवन, पर्याप्त कमरे और बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराना सरकार और विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

कब बदलेगी बच्चों की तस्वीर?

प्राथमिक विद्यालय मैरवा की तस्वीर यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर शिक्षा व्यवस्था को लेकर किए जा रहे बड़े-बड़े दावों का लाभ जमीनी स्तर तक कब पहुंचेगा। जब विद्यालय के पास खुद की जमीन उपलब्ध है और भवन निर्माण की संभावना भी मौजूद है, तो फिर इतने लंबे समय से बच्चों को फूस की छत के नीचे पढ़ने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ रहा है?

अब अभिभावकों, स्थानीय लोगों और विद्यालय के शिक्षकों को उम्मीद है कि शिक्षा विभाग इस समस्या को गंभीरता से लेगा और जल्द से जल्द नए भवन के निर्माण की प्रक्रिया शुरू करेगा। यदि समय रहते भवन निर्माण नहीं कराया गया तो आने वाले दिनों में बारिश और अन्य खराब मौसम के दौरान बच्चों की पढ़ाई और अधिक प्रभावित हो सकती है।

मधुबनी के बासोपट्टी स्थित इस विद्यालय की तस्वीर सिर्फ एक स्कूल की समस्या नहीं, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था के उन दावों की परीक्षा भी है, जिनमें हर बच्चे को बेहतर और सुरक्षित माहौल में शिक्षा उपलब्ध कराने की बात कही जाती है। अब देखना होगा कि फूस की छत के नीचे पढ़ने को मजबूर इन ढाई सौ बच्चों को पक्की कक्षा और बेहतर भविष्य का इंतजार आखिर कब खत्म होता है।