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भारत-नेपाल सीमा पर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक आवाजाही बंद, सिर्फ इन्हें मिलेगी छूट; SSB ने क्यों लिया बड़ा फैसला?

India Nepal Border: भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा के मद्देनजर एसएसबी ने रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक आवाजाही बंद रखने का फैसला लागू किया है। इस निर्णय का सीमावर्ती ग्रामीणों ने विरोध करते हुए छूट की मांग की है।

India Nepal border security
प्रतिकात्मक तस्वीर
© Google
Mukesh Srivastava
3 मिनट

India Nepal Border: मधुबनी में भारत-नेपाल सीमा पर रात के समय आवाजाही को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक सीमा पूरी तरह बंद रखने का निर्णय लागू करने की घोषणा की है। हालांकि इस फैसले का सीमावर्ती ग्रामीणों ने विरोध किया है और इसे उनके दैनिक जीवन को प्रभावित करने वाला बताया है।


मधवापुर स्थित एसएसबी कैंप में आयोजित बैठक के बाद 48वीं बटालियन के कमांडेंट राजेंद्र कुमार ने बताया कि भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था लागू की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अवधि में केवल मेडिकल इमरजेंसी के मामलों में ही आवागमन की अनुमति दी जाएगी।


कमांडेंट ने यह भी कहा कि रोजमर्रा के सामान की आवाजाही पर रोक नहीं होगी, लेकिन भारी मात्रा में सामान के आयात-निर्यात और व्यावसायिक परिवहन पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। यह कदम सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।


सीमा पर कई स्थानों पर बैरिकेडिंग किए जाने के बाद शुक्रवार शाम मधवापुर एसएसबी कैंप में अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच लगभग ढाई घंटे तक बैठक हुई। हालांकि, इस बैठक में कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल सका।


बैठक में 48वीं बटालियन के कमांडेंट राजेंद्र कुमार, डिप्टी कमांडेंट हरि नारायण जाट, बेनीपट्टी एसडीएम सारंग पानी पांडे, डीएसपी अमित कुमार, बीडीओ मनोज कुमार मुर्मू, सीओ सुनील कुमार और थाना अध्यक्ष सनी कुमार मौसम सहित कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।


ग्रामीणों ने बैठक में मांग रखी कि रात 10 बजे के बाद सीमा बंद किए जाने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन आपातकालीन स्थिति, शादी-विवाह और आवश्यक कार्यों के लिए आवागमन की छूट मिलनी चाहिए। उनका कहना था कि सीमा पूरी तरह बंद होने से बच्चों की पढ़ाई, रसोई गैस आपूर्ति, सेप्टिक टैंक और अन्य आवश्यक सेवाएं प्रभावित होंगी।


ग्रामीणों ने यह भी कहा कि भारत और नेपाल के बीच वर्षों से सामाजिक और पारिवारिक संबंध रहे हैं। ऐसे में सीमा पर सख्ती से ‘रोटी-बेटी’ के रिश्तों पर भी असर पड़ेगा। बैठक बिना किसी सहमति के समाप्त हो गई। अब देखना होगा कि आगे प्रशासन इस फैसले को कैसे लागू करता है और ग्रामीणों की नाराजगी किस दिशा में जाती है। फिलहाल सीमावर्ती क्षेत्रों में इस निर्णय को लेकर असंतोष और आक्रोश का माहौल बना हुआ है।

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता