MADHUBANI: मधुबनी जिला मुख्यालय सहित पूरे जिले में प्रतिबंध के बावजूद लॉटरी टिकट बेचने का धंधा जोरों पर है। माफिया मालामाल हो रहे हैं जबकि गरीब और कंगाल हो रहे हैं। जिला प्रशासन के नाक के तले खुलेआम यह अवैध कारोबार चल रहा है और पुलिस हाथ पर हाथ धड़े बैठी हुई है। इससे यही साबित होता है कि अवैध धंधे में शामिल धंधेबाजों के अंदर पुलिस का डर खत्म हो गया है। जिसके चलते कभी ये शराब और मादक पदार्थो की तस्करी करते हैं तो कभी अवैध लॉटरी और गेसिंग खिलवाने का काम करते हैं। लॉटरी बेचे जाने का ताजा मामला बिहार के मधुबनी जिले से आ रहा है। जहां करोड़पति बनाने का सपना दिखा लोगों को कंगाल बनाया जा रहा है।
सरकार के द्वारा प्रतिबंधित किए गए धंधे में हर रोज जिले में लाखों रुपए राजस्व की चाेरी के साथ-साथ आम लोग ठगी के शिकार हो रहे हैं और लॉटरी विक्रेता मालामाल हो रहे हैं। रातों रात करोड़पति बनने के सपने देखने वाले गरीब, गुरबे, ठेला, खोमचा चलाने वाले एवं पैकेट खर्च लेकर पढ़ने आने वाले युवा पीढ़ी में भी लॉटरी के टिकट खरीदने का चस्का लगा हुआ है। इन लोगों के द्वारा कम समय में रातों-रात करोड़पति बनने के लिए प्रत्येक रोज 10 रुपए से लेकर 100 रुपए तक के लॉटरी के टिकट खरीदे जाते हैं, लेकिन जब इनको कुछ प्राप्त नहीं होता तो दूसरे दिन अपने भाग्य की आजमाइश करने पुनः उन ब्लैकियर्स के पास पहुंच जाते हैं जो छुपकर लॉटरी के टिकट बेचने का नाजायज धंधा किया करते हैं।
जिला प्रशासन के नाक के तले बिक रहे लॉटरी के टिकट के विक्रेताओं पर प्रशासन भी हाथ डालने से कतराती है। जैसे मानो इन्हें कुछ पता नहीं, लेकिन प्रशासन के लोग को मोटी नजराना देकर इस धंधे के मुख्य सरगना के द्वारा मुंह बंद कर दिया जाता है। कस्बाई बाजार से लेकर मधुबनी जिला मुख्यालय के कोतवाली चौक , मच्छट्टा चौक , बाटा चौक ,ग्रियेशन बाजार , मुख्य किराना मंडी , लोहापट्टी,गदियानी ,बड़ाबाजार ,शंकर चौक सहित जिले के जयनगर बाजार , सकरी ,पंडौल ,फुलपरास सहित छोटे बड़े कस्बाई बाजार में इसकी बिक्री धड़ल्ले से की जाती है। ऐसा नहीं है कि यह टिकट पर लोगों को टिकट पर लिखी हुई राशि प्राप्त हुई हो। लेकिन रातों-रात अमीर बनने के सपने में अपने खून पसीने की गाढ़ी कमाई को प्रत्येक रोज लॉटरी के नाम पर बर्बाद किए जाते हैं। लॉटरी के टिकट खरीददार जिले में कोई अमीर नहीं बना है, लेकिन मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार के भरण पोषण करने की बजाए वह खाक पति जरूर बन गया है। मधुबनी जिला मुख्यालय में तो कई लोग अपने कीमती जमीन तक बेच कर कंगाल हो चुके हैं ।
सरकार द्वारा प्रतिबंधित लॉटरी के टिकट को डुप्लीकेट कर बिक्री करने वाले लोग रातों रात अमीर बन जाते हैं। क्योंकि टिकट खरीदने वाले व्यक्ति या युवा पीढ़ी के लोग अमीर बनने के सपने को लेकर प्रत्येक रोज 100 से लेकर 1000 रुपए तक का भी टिकट खरीदा करते हैं। जिनके पैसे से लोग रातों-रात अमीर बन जाते हैं और प्रशासनिक अधिकारियों को इस बात की भनक तक नहीं है। अलग-अलग डिस्ट्रीब्यूटर के नाम से छपती है लॉटरी सूत्र के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार जिले में चल रहा है लॉटरी के धंधे की माफिया के द्वारा जिले में बनाए गए लॉटरी के डिस्ट्रीब्यूटर के नाम से ही 1 सप्ताह तक के लॉटरी के टिकट माफिया के द्वारा मुहैया कराए जाते हैं।
जिसकी रकम डिस्ट्रीब्यूटर के द्वारा एडवांस में करोड़ों रुपए की भेजे जाते हैं। लॉटरी के टिकट बेचने के बाद डिस्ट्रीब्यूटर की कमाई कितनी है यह अंदाजा लगा पाना मुश्किल है । माफियाओं के द्वारा पूछे नहीं जाते इसलिए की मुख्य विक्रेताओं के द्वारा टिकट के पैसे पहले ही ले लिए जाते हैं। नेट के मध्य से किया जाता है डुप्लीकेट अनुज्ञप्ति प्राप्त कम्पनियों के द्वारा बेचे जा रहे टिकट का रिजल्ट नेट पर निर्गत होने के बाद उसी रिजल्ट की कॉपी कर बिना रजिस्ट्रेशन के प्रतिबंधित लॉटरी के टिकट का रिजल्ट निर्गत किया जाता है। जिससे पूरे जिले में लाखों रुपए राजस्व चोरी की जाती है।







