लखीसराय: सावन की तीसरी सोमवारी पर बिहार के प्रसिद्ध श्री इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर, अशोक धाम में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। सोमवार सुबह मंदिर परिसर में अचानक भगदड़ जैसी स्थिति बनने से कई श्रद्धालु इसकी चपेट में आ गए। हादसे में कई लोगों की मौत हुई है, जबकि कई श्रद्धालु घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद मंदिर परिसर से लेकर अस्पताल तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
हादसे के बाद बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घटना पर गहरा दुख जताया है। मुख्यमंत्री की ओर से मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान देने की घोषणा की गई है। अधिकारियों को पीड़ित परिवारों तक सहायता राशि पहुंचाने और घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
अशोक धाम में कैसे हुआ हादसा?
जानकारी के अनुसार, सावन की तीसरी सोमवारी होने के कारण सुबह से ही अशोक धाम मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंच रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 50 हजार श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने से परिसर और आसपास के इलाकों में भीड़ काफी बढ़ गई थी। इसी दौरान अचानक अफवाह फैलने के बाद भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, खंभा गिरने की अफवाह फैलने के बाद श्रद्धालुओं में अचानक भगदड़ मची। भीड़ का दबाव इतना बढ़ गया कि कई लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े। शुरुआती जानकारी में सात श्रद्धालुओं की मौत की पुष्टि हुई थी, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचकर घायलों को अस्पताल पहुंचाने में जुटा रहा।
CM सम्राट चौधरी ने किया 4 लाख रुपये की सहायता का ऐलान
हादसे की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मृतकों के परिजनों के लिए प्रति परिवार 4 लाख रुपये के अनुग्रह अनुदान की घोषणा की है। सरकार की ओर से यह सहायता राशि आपदा से जुड़े निर्धारित प्रावधानों के तहत दी जाएगी। अधिकारियों को राहत कार्य में तेजी लाने और प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इससे पहले भी बिहार सरकार की ओर से आपदा में मृत लोगों के आश्रितों को 4-4 लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान दिए जाने की व्यवस्था लागू रही है। लखीसराय में हाल ही में वज्रपात से मृत लोगों के परिवारों को भी इसी प्रावधान के तहत 4-4 लाख रुपये की सहायता दी गई थी।
घायलों के इलाज पर प्रशासन का फोकस
हादसे के बाद प्रशासन की प्राथमिकता घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। राहत एवं बचाव टीमों ने भीड़ को नियंत्रित करने के साथ घायलों को अस्पताल पहुंचाने का काम किया।
मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए भीड़ प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक दो ट्रेनों के ठहराव के कारण भी श्रद्धालुओं की संख्या अचानक बढ़ गई थी, जिससे मंदिर परिसर में दबाव और अधिक बढ़ गया।
सावन की सोमवारी पर उमड़ी थी भारी भीड़
अशोक धाम लखीसराय का प्रमुख धार्मिक स्थल है और सावन के महीने में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। सावन की सोमवारी पर श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में प्रशासन के सामने भीड़ को नियंत्रित करना बड़ी चुनौती बन जाता है।
फिलहाल हादसे के बाद प्रशासन स्थिति को नियंत्रित करने में जुटा है। घटना के कारणों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आगे की जांच में स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। सरकार की ओर से मृतकों के परिवारों को 4-4 लाख रुपये की सहायता की घोषणा के बाद अब पीड़ित परिवारों को जल्द राहत राशि मिलने की उम्मीद है।
अशोक धाम हादसे ने एक बार फिर बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन, बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रशासन को भविष्य में ऐसे आयोजनों के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत होगी।





