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आलुआबाड़ी–सिलीगुड़ी रेल लाइन का होगा दोहरीकरण: जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू, जाने कब तक पूरा होगा काम

Bihar News: किशनगंज जिले में आलुआबाड़ी रोड से सिलीगुड़ी तक रेल लाइन के दोहरीकरण की दिशा में काम शुरू हो गई है। इसके तहत विभागीय स्तर पर मापी कार्य किया जा रहा है और जमीन अधिग्रहण की तैयारी तेज हो गई है। रेलवे की ओर से इस परियोजना को लेकर...

आलुआबाड़ी–सिलीगुड़ी रेल लाइन का होगा दोहरीकरण: जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू, जाने कब तक पूरा होगा काम
Ramakant kumar
4 मिनट

Bihar News: किशनगंज जिले के पोठिया क्षेत्र में रेलवे ने आलुआबाड़ी रोड से सिलीगुड़ी तक रेल लाइन के डबल लाइन के काम की तैयारी तेज कर दी है। इस परियोजना के लिए जमीन की मापी यानी नाप-जोख का काम शुरू कर दिया गया है, ताकि यह तय किया जा सके कि कितनी जमीन की जरूरत पड़ेगी और किन-किन जगहों पर काम आगे बढ़ेगा।


रेलवे विभाग के कर्मचारी और अधिकारी मौके पर पहुंचकर पोठिया रेलवे स्टेशन, रेलवे क्वार्टर, आसपास के चौक और आबादी वाले इलाकों में मापी कर रहे हैं। जिन जगहों पर लोगों के घर, दुकान या रेलवे की अपनी इमारतें बनी हुई हैं, वहां भी जमीन की पूरी जांच की जा रही है। इसका मकसद यह है कि भविष्य में बनने वाली दूसरी पटरी के लिए सही जगह तय की जा सके।


रेलवे की योजना है कि मौजूदा रेलवे लाइन के पश्चिम तरफ एक और समानांतर पटरी बिछाई जाएगी। यानी जहां अभी एक लाइन है, उसके बगल में दूसरी लाइन बनाई जाएगी। इससे ट्रेनों की आवाजाही आसान होगी और एक साथ ज्यादा ट्रेनें चल सकेंगी।


इस काम के दौरान कुछ रेलवे क्वार्टर, रेलवे का काली मंदिर और कुछ आम लोगों के घर भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। रेलवे क्वार्टर तो रेलवे की अपनी संपत्ति है, लेकिन कुछ निजी घर और निर्माण भी इस दायरे में आ सकते हैं। ऐसे मामलों में रेलवे ने साफ किया है कि नियमों के अनुसार जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा और जिन लोगों की जमीन या मकान इसमें आएंगे, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाएगा।


अधिकारियों ने बताया कि मापी पूरी होने के बाद एक सीमा रेखा तय की जाएगी, जिसके अंदर आने वाली जमीन को परियोजना के लिए चिन्हित किया जाएगा। इसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी।


इस परियोजना का उद्देश्य भविष्य में बढ़ने वाले रेलवे ट्रैफिक को संभालना है। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक ट्रेन संचालन के लिए बिजली के खंभे, ओवरहेड तार (OHE लाइन) और अन्य तकनीकी काम भी इसी योजना का हिस्सा होंगे। इसके अलावा पोठिया रेलवे स्टेशन के विस्तार की भी संभावना है, जिसके लिए अतिरिक्त जमीन की जरूरत पड़ेगी।


स्थानीय जानकारी के अनुसार, आलुआबाड़ी रोड से सिलीगुड़ी तक का यह रेल मार्ग कई हिस्सों में पहले से ही व्यस्त है। खासकर पोठिया और तैयबपुर के बीच लगभग 15 किलोमीटर का इलाका ऐसा है जहां जगह काफी सीमित है। इसी हिस्से में सबसे ज्यादा दिक्कत जमीन की बताई जा रही है।


पोठिया हाल्ट रेलवे स्टेशन और चौक के बीच का क्षेत्र सबसे ज्यादा तंग माना जा रहा है, इसलिए जमीन अधिग्रहण की सबसे अधिक जरूरत इसी इलाके में पड़ेगी। यहां पहले से ही आबादी और रेलवे की सीमित जमीन के कारण विस्तार करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।


वहीं इसके मुकाबले पोठिया के बाकी हिस्सों में स्थिति थोड़ी आसान है, क्योंकि वहां अधिकतर जमीन खुली हुई है या फिर खेतिहर जमीन है। कई जगह रेलवे की अपनी जमीन भी मौजूद है, जिससे काम अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।