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जमुई में शिक्षा विभाग के DPO पर लगा दुष्कर्म का आरोप, रसोइया के साथ कर रहा था गंदा काम

JAMUI : बिहार के जमुई में शिक्षा विभाग के डीपीओ पर बड़ा आरोप लगा है। इनके ऊपर महिला के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। यह आरोप कोई और नहीं बल्कि उन्हीं के घर में काम कर रही रसोई

जमुई में शिक्षा विभाग के DPO पर लगा दुष्कर्म का आरोप, रसोइया के साथ कर रहा था गंदा काम
Tejpratap
Tejpratap
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JAMUI : बिहार के जमुई में शिक्षा विभाग के डीपीओ पर बड़ा आरोप लगा है। इनके ऊपर महिला के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। यह आरोप कोई और नहीं बल्कि उन्हीं के घर में काम कर रही रसोईया ने लगाया है। महिला ने इसको लेकर व्यवहार न्यायालय में मुकदमा दर्ज कराया है। इसके आलावा भी इस डीपीओ के पर कई अन्य गंभीर आरोप भी लगाया गया है। जिससे शिक्षा विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है।


दरअसल, जमुई नगर परिषद क्षेत्र की एक महिला ने अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम के समक्ष परिवाद दायर किया है। इस परिवाद में उन्होंने बताया कि,  कुछ दिन पूर्व डीपीओ स्थापना शिवकुमार शर्मा से उनकी मुलाकात सरकारी बस डिपो के पास हुई थी। इस दौरान उन्होंने खुद को डीपीओ बता कर अपने आवास पर खाना बनाने के लिए कहा था। इसकी ऐवज में पैसा देने की बात कही गई थी, लेकिन महिला खाना बनाने के लिए तैयार नहीं हुई।


इसके बाद फिर डीपीओ के द्वारा उनके पुत्र को कार्यालय में काम दिलवाने का प्रालिभन दिया गया। उसके बाद महिला उनके आवास में खाना बनाने लगी। इस दौरान जब वह खाना बना कर घर जा रही थी तो अचानक डीपीओ स्थापना शिवकुमार शर्मा के द्वारा महिला को पकड़ लिया गया और जबरन शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाया जाने लगा। जब महिला ने इसका विरोध किया तो उसे पकड़कर कमरे की तरफ खींचने लगे उसके बाद महिला ने हल्ला की तब कुछ लोग आए और महिला दुष्कर्म की शिकार होने से बच गई। ऐसा पीड़िता महिला का आरोप है। इसके बाद पीड़ित महिला अपनी शिकायत लेकर सबसे पहले महिला sc-st थाना भी गई थी लेकिन थानाध्यक्ष के नहीं रहने के बाद उन्होंने कोर्ट में परिवाद दायर कराया।


इधर, इस संबंध में डीपीओ स्थापना शिवकुमार शर्मा ने बताया कि ऐसी कोई भी बात नहीं हुई है। उनके ऊपर लगाया गया आरोप बेबुनियाद और झूठा है।उन्हें साजिश के तहत बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इसके बाद अब इस मामले में व्यवहार न्यायालय में सुनवाई की जाएगी। बहरहाल, अब देखना यह है कि इस मामले में न्यायालय का क्या निर्णय होता है।