जमुई के पहाड़ी और जंगली इलाकों में नक्सल गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए सुरक्षा बलों का अभियान लगातार जारी है. इसी क्रम में सीआरपीएफ की 215 बटालियन और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने नक्सल विरोधी सर्च ऑपरेशन के दौरान जंगल में छिपाकर रखी गई एक देसी राइफल बरामद की है. हथियार की बरामदगी के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके में निगरानी और सर्च अभियान और तेज कर दिया है.
जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बलों को गुरमाह, मुशहरिटांड, करहरा और आसपास के पहाड़ी-जंगली इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली थी. सूचना के आधार पर सीआरपीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने संबंधित क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन शुरू किया. जवानों ने जंगल और पहाड़ी इलाकों में संदिग्ध स्थानों की पहचान कर वहां बारीकी से तलाशी ली.
अभियान के दौरान 215 बटालियन की क्विक एक्शन टीम यानी QAT और ए/215 समवाय चोरमारा के जवान भी शामिल रहे. दुर्गम पहाड़ी और जंगल वाले इलाके में जवानों ने सावधानी के साथ आगे बढ़ते हुए संभावित ठिकानों की तलाशी ली. इसी दौरान जंगल के अंदर छिपाकर रखी गई देसी राइफल बरामद हुई.
हथियार मिलने के बाद जवानों ने उसे अपने कब्जे में ले लिया और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई. सुरक्षा एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि हथियार को जंगल में किसने छिपाया था और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था.
नक्सल प्रभावित इलाकों में हथियारों की बरामदगी को सुरक्षा बलों के लिए अहम कामयाबी माना जाता है. अधिकारियों के मुताबिक, जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में हथियार छिपाकर रखे जाने की आशंका को देखते हुए लगातार सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं. बरामद राइफल के बारे में भी पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां जानकारी जुटा रही हैं.
यह अभियान मुजफ्फरपुर रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक संदीप सिंह के दिशा-निर्देश और 215 बटालियन के कमांडेंट विनोद कुमार मोहरिल के नेतृत्व में चलाया गया. संयुक्त टीम की कार्रवाई के बाद सुरक्षा बलों ने आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है.
सुरक्षा बलों का कहना है कि पहाड़ी और जंगली क्षेत्रों में नक्सल गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे. अभियान के दौरान हथियार और संदिग्ध ठिकानों की तलाश के साथ-साथ इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है.





