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GAYA: जीवित रहते बुजुर्ग ने निकाली अपनी अंतिम यात्रा, अर्थी पर लेटकर पहुंच गये मुक्तिधाम, वहां क्या कुछ हुआ जानिये?

गया जिले के कोच्चि गांव में 74 वर्षीय भूतपूर्व वायु सैनिक मोहन लाल ने जीवित रहते अपनी अंतिम यात्रा निकाली। अर्थी पर लेटकर मुक्तिधाम पहुंचे और प्रतीकात्मक पुतला दहन कर ‘मृत्यु उत्सव’ मनाया। इलाके में इस अनोखी शव यात्रा की चर्चा हो रही है।

बिहार
अनोखी शव यात्रा
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
2 मिनट

GAYA: गया जिले के गुरुआ विधानसभा क्षेत्र के कोच्चि गांव में शनिवार को एक अनोखा दृश्य देखने को मिला। यहां 74 वर्षीय भूतपूर्व वायु सेना कर्मी मोहन लाल ने जीवित रहते ही अपनी अंतिम यात्रा निकाली।


बैंड-बाजे और “राम नाम सत्य है” की गूंज के बीच मोहन लाल फूल-मालाओं से सजी अर्थी पर लेटे हुए मुक्तिधाम पहुंचे। इस दौरान ‘चल उड़ जा रे पंछी, अब देश हुआ बेगाना’ की धुन बज रही थी। पूरे गांव में यह अनोखी शव यात्रा चर्चा का विषय बन गई और सैकड़ों ग्रामीण इसमें शामिल हुए।


मुक्तिधाम पहुंचने के बाद मोहन लाल का प्रतीकात्मक पुतला जलाया गया और सामूहिक प्रीतिभोज का आयोजन किया गया। इस अनोखी यात्रा का उद्देश्य मोहन लाल की एक विशेष इच्छा को पूरा करना था। उन्होंने कहा, “मरने के बाद लोग अर्थी उठाते हैं, लेकिन मैं चाहता था कि यह दृश्य मैं खुद देखूं और जान सकूं कि लोग मुझे कितना सम्मान और स्नेह देते हैं।”


बरसात के दिनों में शवदाह में आने वाली दिक्कतों को देखते हुए मोहन लाल ने अपने निजी खर्च से गांव में एक सुविधायुक्त मुक्तिधाम का निर्माण कराया है। वे लंबे समय से समाजसेवा से जुड़े रहे हैं। मोहन लाल ने सर्वोदय उच्च विद्यालय गुरारू से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और आगे की पढ़ाई गया में पूरी की। उनके परिवार में दो पुत्र और एक पुत्री हैं। 


बड़े पुत्र डॉ. दीपक कुमार कोलकाता में डॉक्टर हैं, जबकि छोटे पुत्र विश्व प्रकाश स्थानीय 10+2 विद्यालय में कार्यरत हैं। पुत्री गुड़िया कुमारी धनबाद में रहती हैं। उनकी पत्नी जीवन ज्योति का 14 वर्ष पूर्व निधन हो गया था। ग्रामीणों का कहना है कि मोहन लाल का यह कदम पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है।

गया से नितम राज की रिपोर्ट