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80 साल से रामनवमी का झंडा बना रहा मुस्लिम परिवार, गंगा-जमुनी तहजीब की बड़ी मिसाल

मो.यूनुस का कहना है कि यह काम उन्हें विरासत में मिली है। रामनवमी के झंडा बनाने का काम पहले हमारे पूर्वज किया करते थे। उसी परंपरा को आज हम जीवित रखे हुए हैं। पहले परदादा और दादा रामनवमी का झंडा बनाते थे आज हम यह झंडा बना रहे हैं।

BIHAR
गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल
© GOOGLE
Jitendra Vidyarthi
5 मिनट

GAYA: बिहार के गया जिले में एक मुस्लिम परिवार गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश कर रहा हैं। यह मुस्लिम परिवार पुश्त दर पुश्त रामनवमी का झंडा बनाते आ रहे हैं। आज के दौर में जहां समाज में नफरत घोलने की कोशिश होती है, इसके बीच यह मुस्लिम परिवार बड़ा संदेश देने का काम कर रहा है। यह परिवार गंगा-जमुनी तहजीब का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आए हैं।


गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल 

बिहार के गया जिले के केपी रोड इलाके में एक मुस्लिम परिवार के द्वारा लगातार कई पुश्तों से रामनवमी का झंडा तैयार किया जा रहा है। तीन फीट से लेकर 45 फीट और उससे भी बड़ा झंडा ऑर्डर पर ये बना रहे हैं। चैत नवमी और शोभा यात्रा को लेकर मुस्लिम परिवार के लोग लगातार रामनवमी का झंडा बनाने में लगे हैं। 


परदादा-दादा भी रामनवमी झंडा बनाते थे

मोहम्मद यूनुस रामनवमी का झंडा बनाने में लगे हुए हैं। मुस्लिम टोपी पहनकर भगवान राम और हनुमान जी की फोटो लगाकर झंडा बनाने में जुटे हुए हैं। इनके हाथों से बना रामनवमी का झंडा स्थानीय दुकानों के साथ-साथ बिहार-झारखंड के कई हिस्सों में सप्लाई किया जाता है। मो.यूनुस का कहना है कि यह काम उन्हें विरासत में मिली है। रामनवमी के झंडा बनाने का काम पहले हमारे पूर्वज किया करते थे। उसी परंपरा को आज हम जीवित रखे हुए हैं। पहले परदादा और दादा रामनवमी का झंडा बनाते थे आज हम यह झंडा बना रहे हैं। 


रामनवमी झंडा बनाने में हमें बहुत अच्छा लगता है। हम लोग रामनवमी का झंडा इसलिए बनाते है कि क्योंकि उन्हें हर धर्म के प्रति आस्था है। उन्हें हिंदू भाइयों के लिए रामनवमी का झंडा सिलने में काफी सुकून महसूस होता है। मोहम्मद युनुस बताते हैं, कि हमारे यहां का बना झंडा गया जिला या बिहार तक ही सीमित ही नहीं, बल्कि हमारे हाथों से बना रामनवमी झंडा पड़ोसी राज्य झारखंड के कई जिलों में जाता है। झारखंड के रांची, धनबाद में भी हमारे यहां का सिला हुआ झंडा बिकता है।


3 फीट से लेकर 45 फीट तक के झंडे की डिमांड ज्यादा

वहीं मोहम्मद सलीम का कहना है कि 3 फीट से लेकर 45 फीट तक के रामनवमी झंडे की सबसे ज्यादा डिमांड है। इससे भी बड़ा झंडा हम बना रहे हैं। हम बचपन से ही रामनवमी का झंडा सिल रहे हैं। पहले हमारे परदादा, दादा, अब्बू रामनवमी का झंडा बनाते थे. पहले अपने पिता के साथ दुकान पर झंडा बनाने आया करता था. पिछले 60 साल से वे लगातार रामनवमी का झंडा बना रहे हैं। रामनवमी के झंडे में भगवान राम, हनुमान जी का फोटो लगाते हैं। एक से बढ़कर एक रामनवमी के झंडे तैयार किये गये हैं। 100 रूपए से लेकर हजार रुपये का झंडा इस बार बाजारों में है। झंडा बनाकर स्थानीय दुकानों में बेचते हैं। इसके अलावा बिहार और झारखंड के कई जिलों में हमारे दुकानों का बना रामनवमी का झंडा जाता है।


80 साल से यह मुस्लिम परिवार पेश कर रहा मिसाल 

एक तरफ सांप्रदायिक सौहार्द में खलल डालने की कोशिश असामाजिक तत्वों द्वारा की जाती है, लेकिन ये मुस्लिम परिवार के लोग पिछले 80 साल से गंगा- जमुनी तहजीब की मिसाल बने हुए हैं. यह बताते हैं कि रामनवमी का झंडा वे पूरी श्रद्धा से बनाते हैं. पुश्त दर पुश्त उसके परिवार के लोग यह काम करते आ रहे हैं, तो विरासत में उन्हें रामनवमी का झंडा सिलने की कला मिली है, और रामनवमी का झंडा सिलने में ज्यादा समय नहीं लगता है. आसानी से रामनवमी का झंडा रोजाना बङे पैमाने पर तैयार कर लेते हैं. वही, मुस्लिम परिवार के सिले रामनवमी का झंडा बेचने वाले शिवकुमार गुप्ता बताते हैं कि सालों से हम लोग आपसे तौर पर मिलजुल कर रहते हैं. यह लोग रामनवमी का झंडा बनाते हैं और हम लोग बेचते हैं.


पहले पूर्वज बनाते थे रामनवमी का झंडा 

इनका कहना है कि पहले यह काम उनके पूर्वज करते थे आज हम कर रहे हैं। पुरानी परंपरा को आज भी हम जिंदा रखे हुए हैं। हम रामनवमी के झंडा को पूरी श्रद्धा से बनाते हैं. हिंदू भाईयों के लिए रामनवमी का झंडा बनाकर उन्हें काफी सुकून मिलता है. किसी प्रकार की विद्वेष की भावना से हटकर सभी धर्म में हम लोग आस्था रखते हैं. यही वजह है, कि हम विरासत में मिली परंपरा को निभा रहे हैं.

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