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1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sat, 05 Jul 2025 09:53:57 AM IST
बिहार न्यूज - फ़ोटो GOOGLE
Bihar News: बिहार के बोधगया के टिका बिगहा गांव में हाल ही में हुए लूटकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है, जिसमें हैरान करने वाली सच्चाई सामने आई है। लूट की इस घटना का मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि उत्पाद विभाग का एएसआई (सहायक अवर निरीक्षक) अंजनी कुमार निकला है। बोधगया पुलिस ने गुरुवार देर रात छापेमारी कर एएसआई अंजनी कुमार समेत तीन आरोपियों – दीपक कुमार और अजीत चौधरी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि चौथा आरोपी दिलीप कुमार अब भी फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की छापेमारी जारी है।
दरअसल, यह मामला 24 जून की शाम का है, जब गांव के चंदन कुमार अपनी पत्नी के साथ बाजार गए हुए थे। उसी दौरान दो बाइक पर सवार चार लोग उनके घर पहुंचे, जहां उनके तीन बच्चे मौजूद थे। आरोपियों ने बच्चों को धमकाकर कहा कि उनके पिता से कर्ज मांगने आए हैं और इसके बाद मारपीट कर कमरे की चाबी छीन ली। आरोपियों ने अलमारी तोड़कर नकदी और गहनों की लूट की और फरार हो गए। मामला दर्ज होने के बाद सिटी एसपी रामानंद कुमार कौशल और एसडीपीओ सौरव जायसवाल के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई, जिसने घटनास्थल और आस-पास के सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच की। जांच में चारों आरोपियों की पहचान स्पष्ट रूप से हो गई, जिसमें अंजनी कुमार की संलिप्तता से पुलिस भी स्तब्ध रह गई।
बोधगया इंस्पेक्टर मनोज कुमार सिंह की टीम ने जब गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ की, तो उन्होंने जुर्म कबूल कर लिया। सिटी एसपी और एसडीपीओ खुद पीड़ित के घर पहुंचे और बच्चों से पूछताछ की। बच्चों ने भी आरोपियों को पहचान लिया, जिससे मामले की पुष्टि हो गई। शुक्रवार को आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जिसमें यह देखा गया कि अंजनी कुमार को बिना हथकड़ी के लाया गया जबकि अन्य दो आरोपियों को हथकड़ी पहनाई गई थी। इस पर पुलिस अधिकारियों ने सफाई देते हुए कहा कि अंजनी कुमार एक सरकारी कर्मचारी है, इसलिए उसे कानूनी प्रक्रिया के अनुसार पेश किया गया।
सूत्रों के अनुसार, पीड़ित चंदन पहले महुआ का व्यवसाय करता था और अंजनी कुमार द्वारा कथित रूप से वसूली के इरादे से घटना को अंजाम दिए जाने की चर्चा है, हालांकि इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस इस पूरे प्रकरण में लूटे गए कैश और गहनों की बरामदगी को लेकर पूछताछ और जांच में जुटी हुई है। यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि जब कानून की रक्षा करने वाले ही कानून तोड़ने लगें, तो आम जनता की सुरक्षा किसके हाथ में है।