Bihar News: बिहार में विकास, सड़क और बेहतर सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन गया जिले का एक गांव आज भी ऐसी बदहाली में जीने को मजबूर है, जहां तक पहुंचने के लिए लोगों को कीचड़, खेत और टूटी पगडंडियों का सहारा लेना पड़ता है। हालत यह है कि बरसात के दिनों में गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती, मरीजों को खाट पर लादकर अस्पताल ले जाना पड़ता है और सड़क नहीं होने की वजह से युवक-युवतियों की शादियां तक टूट जाती हैं।
यह कहानी गया जिले के टिकारी प्रखंड स्थित गुलरियाचक गांव की है, जहां आज भी सड़क ग्रामीणों के लिए एक अधूरा सपना बनी हुई है। मुख्य सड़क एनएच-69 से गांव की दूरी महज दो किलोमीटर है, लेकिन यही दो किलोमीटर यहां के लोगों के लिए सबसे बड़ी परेशानी और मजबूरी बन चुके हैं।
बरसात के मौसम में गांव की तस्वीर और भी भयावह हो जाती है। सड़क की जगह कीचड़ भरे रास्ते नजर आते हैं। ग्रामीण हाथ में चप्पल लेकर किसी तरह गांव से बाहर निकलते हैं। कई जगहों पर पानी भर जाने से पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। गांव वालों का कहना है कि बारिश के दिनों में पूरा इलाका टापू जैसा बन जाता है।
ग्रामीण बताते हैं कि कई बार गंभीर मरीजों को चारपाई या खाट पर टांगकर अस्पताल पहुंचाना पड़ता है, क्योंकि गांव तक एंबुलेंस नहीं आ सकती। इतना ही नहीं, आज तक गांव में अग्निशमन विभाग की गाड़ी भी नहीं पहुंच पाई है। किसी घर में आग लग जाए तो लोग खुद ही बाल्टी और मोटर के सहारे आग बुझाने को मजबूर हो जाते हैं।
सड़क नहीं होने की सबसे दर्दनाक मार गांव के रिश्तों पर पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां के लड़के-लड़कियों की शादियां सिर्फ इसलिए टूट जाती हैं क्योंकि लोग गांव की स्थिति देखकर रिश्ता करने से मना कर देते हैं। कई परिवारों ने बताया कि लड़की वाले गांव तक आने के बाद वापस लौट जाते हैं और कहते हैं कि जहां सड़क नहीं, वहां रिश्ता कैसे करेंगे।
गांव की एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि जब उनकी शादी हुई थी तब भी गांव में सड़क नहीं थी और अब उनके नाती-पोते हो गए, लेकिन हालात आज भी वैसे ही हैं। उन्होंने कहा कि हर चुनाव में नेता आते हैं, सड़क बनाने का वादा करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही सब भूल जाते हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक साल 1983 में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर भी इस गांव पहुंचे थे। उस समय उन्हें भी गांव तक पैदल चलकर आना पड़ा था। तब ग्रामीणों को सड़क निर्माण का भरोसा मिला था, लेकिन करीब चार दशक गुजर जाने के बाद भी गांव सड़क से नहीं जुड़ पाया।
करीब 1500 की आबादी वाला गुलरियाचक गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहा है। गांव के लोगों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि विकास के दावे सिर्फ शहरों तक सीमित हैं, गांव आज भी उपेक्षा का शिकार हैं।
हालांकि टिकारी विधायक अजय दांगी ने कहा है कि मामला उनके संज्ञान में है और सड़क निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू कराई जाएगी। लेकिन गांव वालों का कहना है कि वे वर्षों से सिर्फ आश्वासन ही सुनते आ रहे हैं।
(गया से नितम राज की रिपोर्ट)




