Bihar News: बक्सर जिले में एक ऐसी भावुक घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को भावुक कर दिया। 23 साल पहले घर छोड़कर गया एक बेटा अचानक योगी के वेश में अपने गांव लौट आया। लंबे बाल, बढ़ी दाढ़ी, कंधे पर झोला और हाथ में सारंगी लिए जब वह अपने ही घर के दरवाजे पर भिक्षा मांगने पहुंचा, तो पहले तो कोई उसे पहचान नहीं सका। लेकिन जैसे ही उसने सारंगी की धुन पर बचपन और परिवार से जुड़े गीत गाने शुरू किए, घरवालों की आंखें नम हो गईं।
यह मार्मिक घटना बक्सर जिले के धनसोई बाजार स्थित लोहार टोली की बताई जा रही है। परिवार के लोगों ने जब उसकी आवाज और गीतों में अपने घर-परिवार की बातें सुनीं, तब उन्हें एहसास हुआ कि यह कोई और नहीं बल्कि उनका वही बेटा लखन शर्मा है, जो करीब 23 साल पहले घर छोड़कर चला गया था।
जानकारी के अनुसार, साल 2003 में महज 15 साल की उम्र में लखन शर्मा किसी बात को लेकर पिता की डांट से नाराज होकर घर से निकल गया था। परिवार ने उसे काफी खोजा, रिश्तेदारों से पूछताछ की, लेकिन उसका कहीं कोई पता नहीं चला। धीरे-धीरे घरवालों ने उम्मीद छोड़ दी थी कि उनका बेटा कभी वापस लौटेगा।
सोमवार को अचानक गांव में एक संन्यासी के पहुंचने की खबर फैली। हाथ में सारंगी लिए वह युवक घर-घर घूम रहा था। जब वह अपने घर पहुंचा और भिक्षा मांगते हुए पुराने गीत गाने लगा, तब परिवार के लोग उसे पहचानकर हैरान रह गए। देखते ही देखते घर में चीख-पुकार मच गई। मां, बहन और अन्य परिजन उसे देखकर फूट-फूटकर रोने लगे। आसपास के ग्रामीण भी मौके पर जुट गए और यह दृश्य देखकर भावुक हो उठे।
परिवार के लोगों ने लखन से घर लौट आने की अपील की। बहनों और रिश्तेदारों ने उसे समझाने की कोशिश की कि अब वह संन्यास छोड़कर परिवार के साथ रहे। लेकिन लखन ने साफ कहा कि वह अब संन्यासी जीवन अपना चुका है और उत्तर प्रदेश के एक मठ से दीक्षा ले चुका है। उसने बताया कि अब उसका जीवन गुरु और सनातन परंपरा को समर्पित है।
लखन ने यह भी कहा कि उसकी संन्यास प्रक्रिया तभी पूरी मानी जाएगी, जब वह अपने माता-पिता के हाथों से भिक्षा ग्रहण करेगा। बेटे की यह बात सुनकर परिवार और ज्यादा भावुक हो गया। आखिरकार पिता ने भारी मन से बेटे को भिक्षा दी। उस वक्त पिता की आंखों से आंसू लगातार बह रहे थे। गांव के कई लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
गांव वालों का कहना है कि उन्होंने पहली बार ऐसा दृश्य देखा, जहां वर्षों बाद खोया बेटा मिला भी तो संन्यासी बनकर। यह पल परिवार के लिए खुशी और दर्द दोनों लेकर आया। एक तरफ बेटे के जीवित लौटने की खुशी थी, तो दूसरी तरफ उसके फिर से चले जाने का दुख।





