बिहार से होकर गुजरने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों से सफर करने वाले यात्रियों के लिए अहम खबर है। भारतीय रेलवे ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्टेशन पर चल रहे एनआई (नॉन-इंटरलॉकिंग) कार्य के कारण कई प्रमुख ट्रेनों के रूट में अस्थायी बदलाव किया है। इस बदलाव का असर खास तौर पर 29 और 30 अप्रैल को देखने को मिलेगा, जिससे यात्रियों को समय और रूट दोनों में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
रेलवे द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र के पुणे से दरभंगा आने वाली पुणे-दरभंगा एक्सप्रेस को 29 अप्रैल को परिवर्तित मार्ग से चलाया जाएगा। यह ट्रेन अब औड़िहार जंक्शन, जौनपुर, वाराणसी, जिवनाथपुर, प्रयागराज छिवकी और मानिकपुर जंक्शन के रास्ते संचालित होगी। इसी दिन अररिया जिले के जोगबनी से खुलने वाली जोगबनी-आनंद विहार एक्सप्रेस को भी बदले हुए मार्ग से डीडीयू, वाराणसी, लखनऊ और कानपुर सेंट्रल के रास्ते चलाया जाएगा।
वहीं 30 अप्रैल को आनंद विहार से जोगबनी जाने वाली आनंद विहार-जोगबनी एक्सप्रेस का रूट भी परिवर्तित रहेगा। यह ट्रेन कानपुर सेंट्रल, लखनऊ, वाराणसी और डीडीयू के रास्ते चलेगी। इसी तरह असम से चलने वाली कामाख्या-आनंद विहार एक्सप्रेस को 29 अप्रैल को बदले मार्ग से संचालित किया जाएगा, जबकि 30 अप्रैल को आनंद विहार से कामाख्या जाने वाली आनंद विहार-कामाख्या एक्सप्रेस भी इसी परिवर्तित रूट से गुजरेगी।
इसके अलावा 30 अप्रैल को आनंद विहार से पुरी के लिए रवाना होने वाली आनंद विहार-पुरी एक्सप्रेस को भी कानपुर, लखनऊ, वाराणसी और डीडीयू के रास्ते चलाया जाएगा। वहीं दिल्ली से अलीपुरद्वार जाने वाली दिल्ली-अलीपुरद्वार एक्सप्रेस को उत्तर मध्य रेलवे क्षेत्र में करीब 50 मिनट नियंत्रित कर चलाने का निर्णय लिया गया है।
इधर, ट्रेनों के रूट में बदलाव के साथ-साथ देरी की समस्या भी यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। भीषण गर्मी के बीच ट्रेनों के घंटों लेट चलने से यात्रियों को स्टेशनों पर लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। सोमवार को भागलपुर-गांधीधाम एक्सप्रेस करीब चार घंटे, कामाख्या-आनंद विहार एक्सप्रेस पांच घंटे और बरौनी-नई दिल्ली ट्रेन तीन घंटे की देरी से बेगूसराय जिले के बरौनी स्टेशन पहुंचीं।
गर्मियों के इस सीजन में यात्रियों की भीड़ भी लगातार बढ़ती जा रही है। अप्रैल महीने में शादी-ब्याह के कारण बड़ी संख्या में लोग अपने घर आ-जा रहे हैं। इसके अलावा रोज़गार की तलाश में मजदूर वर्ग भी बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों की ओर रुख कर रहा है। ऐसे में ट्रेनों में कंफर्म टिकट मिलना बेहद मुश्किल हो गया है।
तत्काल टिकट बुक करना भी यात्रियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। भारी भीड़ को देखते हुए रेलवे द्वारा कई स्पेशल ट्रेनों का संचालन तो किया जा रहा है, लेकिन यात्रियों की संख्या के मुकाबले यह व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है। नतीजा यह है कि यात्रियों को या तो लंबा इंतजार करना पड़ रहा है या फिर मजबूरी में वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।





