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रेवेन्यू कोर्ट के आदेश के पालन में लापरवाही पर सरकार सख्त, विभाग ने सभी CO को जारी किया आदेश; डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने चेताया

Bihar Bhumi: बिहार सरकार ने वरीय राजस्व न्यायालयों के आदेशों के पालन में लापरवाही पर सख्त कदम उठाया है. सभी अंचल अधिकारियों को 7 दिनों में आदेश पालन का निर्देश जारी किया गया है. इसको लेकर उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने चेतावनी दी है.

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Mukesh Srivastava
5 मिनट

Bihar Bhumi: बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने वरीय राजस्व न्यायालयों के आदेशों की अवहेलना और जानबूझकर विलंब के मामलों को गंभीरता से लेते हुए सख्त निर्देश जारी किए हैं। प्रधान सचिव सी. के. अनिल ने सभी अंचल अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया है कि वरीय राजस्व न्यायालयों द्वारा पारित आदेशों का नियमानुसार अनुपालन हर हाल में 7 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाए, अन्यथा संबंधित पदाधिकारी के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।


प्रधान सचिव द्वारा 22 जनवरी को जारी पत्र में कहा गया है कि राज्य सरकार ने सात निश्चय-3 (2025–30) को 16 दिसंबर 2025 से लागू किया है, जिसके सातवें स्तंभ इज ऑफ लिविंग के अंतर्गत यह सुनिश्चित किया गया है कि राज्य के नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी और बिना अनावश्यक विलंब के न्याय उपलब्ध हो। 


पत्र में उल्लेख किया गया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा तथा उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के भूमि सुधार जन कल्याण संवाद के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि कई अंचल अधिकारी अपर समाहर्ता एवं भूमि सुधार उप समाहर्ता द्वारा पारित अर्द्ध-न्यायिक राजस्व आदेशों को जानबूझकर लंबित रखकर उन्हें निष्प्रभावी बनाने का प्रयास कर रहे हैं। 


इसे विभाग ने न्यायिक व्यवस्था के लिए अत्यंत गंभीर विषय बताया है। उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने विभिन्न स्तर पर न्यायिक निर्देशों के अनुपालन में लापरवाही पर कड़ाई बरतने और प्रमंडलीय आयुक्त, समाहर्ता, अपर समाहर्ता एवं भूमि सुधार उप समाहर्ता के न्यायालयों में भी उपरोक्त आदेश के अनुपालन का निर्देश दिया है। 


प्रधान सचिव ने स्पष्ट किया कि अंचल अधिकारी प्राथमिक राजस्व न्यायालय के रूप में कार्य करते हैं और विभिन्न अधिनियमों के तहत उन्हें न्यायालय की शक्तियां प्रदत्त हैं। वहीं, भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) अंचल अधिकारी के आदेशों के अपीलीय प्राधिकार हैं, जबकि जमाबंदी रद्दीकरण के मामलों की प्रारंभिक सुनवाई अपर समाहर्ता के न्यायालय में होती है। जिला स्तर पर समाहर्ता राजस्व न्यायालय प्रशासन के सर्वोच्च प्राधिकारी हैं, जिनके आदेश निचली अदालतों के लिए बाध्यकारी और अंतिम होते हैं।


पत्र में यह भी कहा गया है कि प्रमंडलीय आयुक्त अपने-अपने क्षेत्र में समाहर्ता द्वारा पारित आदेशों के अपीलीय प्राधिकार हैं और वे राजस्व न्यायालयों के आदेशों का अनुश्रवण कर अनुपालन सुनिश्चित करेंगे, ताकि राजस्व न्यायालयों की गरिमा और न्यायिक अनुशासन बना रहे।


निर्देशों के अनुसार, किसी भी वरीय राजस्व न्यायालय का आदेश आरसीएमएस पोर्टल पर प्रदर्शित होने के बाद अंचल अधिकारी को 7 दिनों के भीतर उसका अनुपालन करना अनिवार्य होगा। यदि आदेश के अनुपालन में सरकारी भूमि या सरकार का हित सन्निहित हो, तो उसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। आदेश की अवहेलना की स्थिति में संबंधित अंचल अधिकारी को पूर्णतः जवाबदेह माना जाएगा।


इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि अंचल में सरकारी भूमि के संरक्षण और सुरक्षा की पूर्ण जिम्मेदारी अंचल अधिकारी की होगी। सरकारी भूमि से संबंधित मामलों में जिला समाहर्ता की पूर्व अनुमति के बिना किसी निम्न राजस्व न्यायालय के आदेश के आधार पर राजस्व अभिलेखों में प्रविष्टि नहीं की जाएगी।


प्रधान सचिव ने कहा कि वरीय न्यायालयों के आदेशों की अवज्ञा न्यायिक अनुशासन का उल्लंघन है और यह संवैधानिक शासन व्यवस्था (अनुच्छेद-14) तथा राजस्व न्यायिक प्रणाली के प्रतिकूल है। ऐसे कृत्य को गंभीर प्रशासनिक कदाचार मानते हुए दोषी अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।


अंत में सभी अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपर समाहर्ता, भूमि सुधार उप समाहर्ता एवं अन्य उच्चतर राजस्व न्यायालयों के आदेशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करें, आदेश के अनुपालन की प्रमाणिक रिपोर्ट आरसीएमएस पोर्टल के माध्यम से सक्षम पदाधिकारी (समाहर्ता) को भेजें तथा आदेशानुसार राजस्व अभिलेखों में आवश्यक प्रविष्टि करें।


उपमुख्यमंत्री सह मंत्री, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि वरीय राजस्व न्यायालयों के आदेशों की अवहेलना अथवा जानबूझकर विलंब किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। सभी स्तर के राजस्व अधिकारियों को अपने वरीय अधिकारियों के आदेश का पालन समय सीमा में करना अनिवार्य है। आरसीएमएस पोर्टल पर आदेश प्रदर्शित होते ही उसका अनुपालन 7 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि एवं सरकार के हित से जुड़े मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। न्यायिक अनुशासन का उल्लंघन गंभीर प्रशासनिक कदाचार है और दोषी अंचल अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता