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Bihar News : बिहार सिपाही भर्ती पेपर लीक कांड: पूर्व DGP सिंघल से जुड़ा कनेक्शन, EOU ने मांगा जवाब—जांच में चौंकाने वाले खुलासे!

बिहार सिपाही भर्ती पेपर लीक मामले में जांच तेज हो गई है। EOU ने पूर्व DGP एसके सिंघल से जवाब मांगा है। जांच में परीक्षा प्रक्रिया में कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं।

Bihar News : बिहार सिपाही भर्ती पेपर लीक कांड: पूर्व DGP सिंघल से जुड़ा कनेक्शन, EOU ने मांगा जवाब—जांच में चौंकाने वाले खुलासे!
Tejpratap
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5 मिनट

Bihar Police Paper Leak : बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। इस बहुचर्चित मामले में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने पूर्व डीजीपी एसके सिंघल से विस्तृत जवाब तलब किया है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और उच्च स्तर की जिम्मेदारियों को भी खंगाला जा रहा है।


ईओयू सूत्रों के अनुसार, अब तक की जांच के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई है, जिसमें परीक्षा प्रक्रिया के कई अहम चरणों में गंभीर खामियां सामने आई हैं। इन खामियों में एजेंसी के चयन से लेकर परीक्षा के संचालन और प्रश्न-पत्र की सुरक्षा तक की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। जांच एजेंसी का मानना है कि यदि इन प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन किया गया होता, तो इतनी बड़ी गड़बड़ी संभवतः रोकी जा सकती थी।


बताया जा रहा है कि तत्कालीन केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) के अध्यक्ष रहे एसके सिंघल को ईओयू की ओर से सिलसिलेवार कई सवाल भेजे गए हैं। इन सवालों में एजेंसी चयन की प्रक्रिया, प्रश्न-पत्र की छपाई, पैकेजिंग, ट्रांसपोर्टेशन और वितरण व्यवस्था से जुड़े बिंदु शामिल हैं। ईओयू ने उनसे इन सभी बिंदुओं पर स्पष्ट और विस्तृत जवाब देने को कहा है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


अधिकारियों का कहना है कि सिंघल के जवाब के बाद ही जांच की अगली दिशा तय की जाएगी। यदि उनके जवाब में किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता के संकेत मिलते हैं, तो उनके खिलाफ भी आगे की कार्रवाई की जा सकती है। ईओयू इस पूरे मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरतना चाहती और हर कड़ी को जोड़कर दोषियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।


गौरतलब है कि बिहार पुलिस में 21 हजार से अधिक सिपाही पदों के लिए 1 अक्टूबर 2023 को परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद पेपर लीक की पुष्टि होने पर इसे रद्द कर दिया गया था, जिससे लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया था। इस घटना ने पूरे राज्य में व्यापक आक्रोश और विरोध को जन्म दिया था।


जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि इस पूरे मामले में संजीव मुखिया के गिरोह की अहम भूमिका रही है। ईओयू के अनुसार, परीक्षा से करीब चार दिन पहले ही प्रश्न-पत्र को सिस्टम से गायब कर लिया गया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इसमें अंदरूनी मिलीभगत की भी आशंका है। इस गिरोह ने कथित तौर पर प्रश्न-पत्र को लीक कर अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूली थी।


इसके अलावा, जांच में यह भी उजागर हुआ है कि प्रश्न-पत्र और अन्य गोपनीय सामग्री के परिवहन के दौरान निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन नहीं किया गया। प्रेस से जिला कोषागार तक प्रश्न-पत्र ले जाने की प्रक्रिया में कई स्तरों पर लापरवाही बरती गई। सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी ने इस पूरे सिस्टम को कमजोर बना दिया, जिसका फायदा उठाकर आरोपियों ने इस साजिश को अंजाम दिया।


अब तक इस मामले में 21 आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि कई अन्य संदिग्धों से पूछताछ जारी है। ईओयू ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। जांच एजेंसी केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) के कुछ पदाधिकारियों की भूमिका की भी गहराई से जांच कर रही है।


सरकार की ओर से भी इस मामले को गंभीरता से लिया गया है और स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में भी काम किया जा रहा है।


कुल मिलाकर, बिहार पुलिस सिपाही भर्ती पेपर लीक मामला अब केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे भर्ती तंत्र की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है। अब सबकी निगाहें ईओयू की अगली कार्रवाई और एसके सिंघल के जवाब पर टिकी हैं, जिससे इस मामले की सच्चाई और भी स्पष्ट हो सकेगी।