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Bihar News: बिहार में भू-माफिया का बड़ा कारनामा, अधिकारियों से सेटिंग कर कब्जा कर ली सरकारी जमीन

Bihar News: बिहार के बांका जिले में प्रखंड के सिलजोरी पंचायत स्थित भनरा मौजा में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है.

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बिहार न्यूज
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Viveka Nand
3 मिनट

Bihar News: बिहार के बांका जिले में प्रखंड के सिलजोरी पंचायत स्थित भनरा मौजा में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। स्थानीय पदाधिकारी और राजस्व कर्मचारियों की मिलीभगत से सरकारी जमीन को फर्जी कागजात के आधार पर निजी संपत्ति के रूप में दिखाकर अतिक्रमण कर लिया गया है। इस मामले में अब भूमाफियाओं में खलबली मच गई है, क्योंकि भूमि सुधार विभाग ने जिलाधिकारी से 15 दिनों में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

रिपोर्ट की मांग होते ही भूमाफिया स्थानीय नेताओं के पास पहुंच कर मामला दबाने की कोशिश कर रहे हैं। पहले यह मामला विधान पार्षद विजय सिंह और फिर तरुण कुमार द्वारा विधान परिषद में उठाया गया, जिससे प्रशासन में हलचल मच गई है। जानकारी के अनुसार, पूर्व अपर समाहर्ता माधव कुमार द्वारा चांदन, बिरनिया, सिलजोरी और कोरिया पंचायतों की लगभग 1000 एकड़ सरकारी भूमि की फर्जी जमाबंदियों को रद्द कर दिया गया है। लेकिन इन जमीनों से अब तक अवैध कब्जा नहीं हटाया गया है।


हालांकि आदेश के अनुसार, इन जमीनों को खाली कराकर वहाँ वृक्षारोपण किया जाना था, लेकिन अधिकारी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। कई सरकारी संपत्तियाँ जैसे काली मंदिर, हाट, पंचायत भवन आदि भी अतिक्रमण की चपेट में हैं, बावजूद इसके संबंधित पदाधिकारी रुचि नहीं दिखा रहे हैं। प्रखंड में खुलेआम जाली हुक्मनामा, बंदोबस्ती परवाना, फर्जी रसीदें, भूदान के नकली कागजात आदि बनाए और बेचे जा रहे हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर न केवल भूमाफिया लाभ कमा रहे हैं, बल्कि एक ही जमीन की कई बार बिक्री, दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में धांधली और भूमि विवादों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है।


भूमाफियाओं को केवल निचले स्तर के कर्मचारियों का ही नहीं, बल्कि कुछ पंचायत प्रतिनिधियों और राजनीतिक नेताओं का भी संरक्षण प्राप्त है। इस मिलीभगत के कारण सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ऐसे में सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और कानूनी व्यवस्था दोनों ही खतरे में नजर आ रही है। इस संबंध में अंचल अधिकारी (सीओ) रविकांत कुमार ने बताया कि "सभी मामलों में क्रमवार कार्रवाई की जा रही है। फर्जी जमाबंदी को रद्द करने के लिए वरीय पदाधिकारी को रिपोर्ट भेजी जा रही है, जिनके आधार पर कई जमाबंदियाँ पहले ही रद्द की जा चुकी हैं