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बिहार के प्रख्यात चिकित्सक डॉ. मोहन मिश्रा का हार्ट अटैक से निधन, दरभंगा में शोक की लहर

DARBHANGA: बिहार के प्रख्यात चिकित्सक पद्मश्री डॉ. मोहन मिश्रा का हार्ट अटैक से गुरुवार की रात निधन हो गया। दरंभागा जिले के लहेरियासराय के बंगाली टोला स्थित आवास में उन्होंने

बिहार के प्रख्यात चिकित्सक डॉ. मोहन मिश्रा का हार्ट अटैक से निधन, दरभंगा में शोक की लहर
Santosh Singh
2 मिनट

DARBHANGA:  बिहार के प्रख्यात चिकित्सक पद्मश्री डॉ. मोहन मिश्रा का हार्ट अटैक से गुरुवार की रात निधन हो गया। दरंभागा जिले के लहेरियासराय के बंगाली टोला स्थित आवास में उन्होंने अंतिम सांस ली। 


परिजनों ने बताया कि पिछले तीन दिनों से वो गंभीर रूप से बीमार थे। उनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव थी। 2014 में पद्मश्री से उन्हें सम्मानित किया गया था। कालाजार बीमारी पर शोध को लेकर उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया था। 1995 में DMCH के मेडिसिन विभाग में एचओडी के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।


डॉक्टर मोहन मिश्रा विश्व स्तर के ख्याति प्राप्त फिजिशियन डॉक्टर थे। उन्होंने कई विषयों व बीमारियों पर शोध किए थे, जिसके बाद उनको तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पद्मश्री से सम्मानित किया था। विश्व में डिमेंशिया यानी भूलने की बीमारी पर प्रभावी और सर्वमान्य रिसर्च नहीं हो सका था।


 डॉ. मोहन मिश्र ने ब्राह्मी नामक पौधे से इस बीमारी के इलाज में सफलता पाई थी। उनके इस रिसर्च को ब्रिटिश जर्नल में जगह दी गई थी। उन्हें कालाजार पर शोध के लिए 2014 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। दरभंगा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पीटल में मेडिसीन विभाग के एचओडी रहे डॉ. मोहन मिश्र वर्ष 1995 में सेवानिवृत्त हुए।


इसके बाद वे बंगाली टोला स्थित घर पर मरीजों को देखने लगे। इस दौरान उनके पास डिमेंशिया के कई मरीज आते थे। इसकी कोई सटीक दवा नहीं होने के चलते बहुत फायदा नहीं होता था। उनका ध्यान आयुर्वेद की तरफ गया तो ब्राह्मी के पौधे की विशेषता की जानकारी हुई। इस विषय में काफी जानकारी जुटाई। आयुर्वेद के कई चिकित्सकों से बात की। फिर इस पौधे से डिमेंशिया के इलाज पर रिसर्च का निर्णय लिया। उनके निधन से दरभंगा में शोक की लहर है। 

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FirstBihar संवाददाता