Bihar Jeevika Didi : बिहार सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। राज्य की लाखों जीविका दीदियों को अब पारंपरिक कामकाज तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीक, डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स का विशेष प्रशिक्षण देकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ा जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे न केवल महिलाओं की आय बढ़ेगी, बल्कि गांवों में रोजगार और आत्मनिर्भरता को भी नई रफ्तार मिलेगी।
राज्य में वर्तमान समय में करीब 13 लाख स्वयं सहायता समूह (SHG) सक्रिय हैं, जिनसे 1 करोड़ 81 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ये महिलाएं गांवों में कुटीर उद्योग, सिलाई-कढ़ाई, खाद्य प्रसंस्करण, रसोई संचालन, लाइब्रेरी, नर्सरी, मछली पालन, बकरी पालन, डेयरी, पशुपालन सहित कई प्रकार के आजीविका आधारित कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। अब सरकार इनकी क्षमता को और अधिक मजबूत बनाने के लिए विशेष कौशल विकास कार्यक्रम शुरू कर रही है।
डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स की मिलेगी ट्रेनिंग
ग्रामीण विकास विभाग ने जीविका दीदियों को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की योजना बनाई है। इसके तहत उन्हें डिजिटल मार्केटिंग, ऑनलाइन ब्रांडिंग, पैकेजिंग, उत्पादों की गुणवत्ता, ग्राहक प्रबंधन और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से बिक्री की पूरी प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इसके लिए विभिन्न ऑनलाइन बिक्री करने वाली कंपनियों के विशेषज्ञ जीविका समूहों के साथ सीधे जुड़कर प्रशिक्षण दे रहे हैं। प्रशिक्षण का उद्देश्य यह है कि गांव में तैयार होने वाले उत्पाद केवल स्थानीय बाजार तक सीमित न रहें, बल्कि देश और विदेश के ग्राहकों तक भी आसानी से पहुंच सकें।
हर पंचायत में डेयरी संचालन की तैयारी
सरकार ग्रामीण विकास विभाग के साथ अन्य विभागों के समन्वय से एक और बड़ी योजना पर काम कर रही है। आने वाले समय में राज्य की हर ग्राम पंचायत में जीविका दीदियों को डेयरी संचालन की जिम्मेदारी देने की तैयारी है। इससे गांवों में दूध उत्पादन, संग्रहण और विपणन की व्यवस्था मजबूत होगी। साथ ही महिलाओं को स्थायी आय का नया स्रोत भी मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डेयरी संचालन का मॉडल सफल होता है तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिलेगा और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी।
हुनर को मिलेगी नई पहचान
जीविका समूहों की महिलाएं लंबे समय से हस्तशिल्प, कपड़ा, खाद्य उत्पाद, मसाले, अचार, पापड़, अगरबत्ती, जैविक उत्पाद और अन्य घरेलू वस्तुओं का निर्माण करती रही हैं। लेकिन बाजार तक सीमित पहुंच और मार्केटिंग की कमी के कारण उनके उत्पादों को अपेक्षित पहचान नहीं मिल पाती थी। नई प्रशिक्षण व्यवस्था के बाद इन उत्पादों की ब्रांडिंग, आकर्षक पैकेजिंग और ऑनलाइन बिक्री आसान होगी। इससे बिहार के ग्रामीण उत्पादों को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
मंत्री ने दिए अधिकारियों को निर्देश
ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जीविका दीदियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आधुनिक तकनीक और बाजार की जानकारी देकर आत्मनिर्भर बनाया जाएगा, ताकि वे अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकें और अधिक आमदनी अर्जित कर सकें।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया सहारा
सरकार का उद्देश्य केवल महिलाओं को प्रशिक्षण देना नहीं है, बल्कि पूरे ग्रामीण आर्थिक तंत्र को मजबूत बनाना है। यदि जीविका समूहों के उत्पादों की बिक्री ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए बढ़ती है तो इससे लाखों परिवारों की आय में वृद्धि होगी, गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय स्तर पर छोटे उद्योगों को भी नई ऊर्जा मिलेगी। सरकार को उम्मीद है कि आधुनिक प्रशिक्षण, डिजिटल तकनीक और बाजार से सीधी कनेक्टिविटी के जरिए बिहार की जीविका दीदियां आने वाले वर्षों में महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास की सबसे मजबूत मिसाल बनकर उभरेंगी।+





