बिहार में जमीन से जुड़े मामलों के निपटारे को लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने अंचल अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी है। अब जमाबंदी में किसी तरह की त्रुटि सुधारने के लिए लोगों के आवेदन का इंतजार करने के बजाय अंचलाधिकारी (CO) खुद रिकॉर्ड की जांच कर गड़बड़ियों को चिन्हित करेंगे और अपनी पहल पर सुधार की कार्रवाई करेंगे। विभाग के सचिव जय सिंह ने गुरुवार को हुई समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए।
बैठक में कई जिले में चल रहे राजस्व कार्यों की समीक्षा की गई। इस दौरान जमाबंदी सुधार, नामांतरण, राजस्व महाअभियान और अभियान बसेरा समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अधिकारियों से जानकारी ली गई। सचिव ने स्पष्ट किया कि अंचल स्तर पर संचालित सभी राजस्व कार्यों की अंतिम जिम्मेदारी संबंधित अंचलाधिकारी की होगी।
आवेदन का इंतजार नहीं, खुद खोजें जमाबंदी की गड़बड़ी
सचिव जय सिंह ने कहा कि जमाबंदी में सुधार के लिए चल रहे अभियान को केवल आवेदनों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। अंचलाधिकारी अपने क्षेत्र की जमाबंदियों को स्वयं देखें और जहां भी त्रुटियां दिखाई दें, वहां नियमानुसार सुधार की पहल करें।
इसका मतलब साफ है कि अब किसी जमीन मालिक को अपनी जमाबंदी में गलती सुधारने के लिए केवल आवेदन देकर कार्रवाई का इंतजार नहीं करना होगा। विभाग चाहता है कि राजस्व रिकॉर्ड में मौजूद गड़बड़ियों को प्रशासन अपनी ओर से भी चिन्हित करे और उनका समाधान करे।
99 प्रतिशत आवेदन रिजेक्ट करने पर तीन CO पर कार्रवाई
समीक्षा बैठक के दौरान सारण जिले के तीन अंचलों में राजस्व महाअभियान के आवेदनों के निपटारे को लेकर अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर नाराजगी जताई गई। 99 प्रतिशत आवेदनों को रिजेक्ट कर देने के मामले में परसा, अमनौर और दरियापुर के अंचलाधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
विभाग का संदेश स्पष्ट है कि राजस्व महाअभियान का उद्देश्य लोगों के जमीन संबंधी मामलों का समाधान करना है, न कि बड़ी संख्या में आवेदन खारिज करना। इसलिए आवेदन के निपटारे में लापरवाही या नियमों की अनदेखी पर अब अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
रिजेक्ट मामलों को भी दोबारा देखें अधिकारी
सचिव ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि जिन मामलों को पहले जमाबंदी में त्रुटि के कारण रिजेक्ट किया गया था, उन्हें दोबारा देखा जाए। अगर आवश्यक सुधार के बाद मामला निपटाने योग्य है तो उसका निष्पादन कराया जाए।यानी पहले किसी त्रुटि के कारण आवेदन खारिज हो जाने के बाद मामला वहीं खत्म नहीं माना जाएगा। आवश्यक सुधार के बाद उसका समाधान कराने की जिम्मेदारी भी संबंधित अंचलाधिकारी की होगी।
मृत रैयतों के उत्तराधिकार नामांतरण पर भी पहल
बैठक में मृत रैयतों के उत्तराधिकार नामांतरण के मामलों को लेकर भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए। सचिव ने कहा कि ऐसे मामलों में भी अंचलाधिकारी अपने स्तर से पहल करें। अक्सर जमीन के रिकॉर्ड में रैयत की मृत्यु के बाद उत्तराधिकारियों का नाम दर्ज नहीं होने से आगे चलकर परिवार के सदस्यों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। विभाग अब ऐसे मामलों के समय पर निष्पादन पर भी जोर दे रहा है।
अभियान बसेरा के लिए पटना आने की जरूरत नहीं
भूमिहीन लोगों के लिए चलाए जा रहे अभियान बसेरा को लेकर भी बैठक में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। सचिव जय सिंह ने कहा कि पात्र भूमिहीन लाभुकों को आवेदन जमा करने के लिए राज्य मुख्यालय आने की जरूरत नहीं है। लाभुक अपने संबंधित अंचल कार्यालय में ही आवेदन जमा कर सकते हैं। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे लोगों को आवेदन प्रक्रिया और पात्रता से जुड़ी सही जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि किसी लाभुक को अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े।
गलत जानकारी देने वालों पर होगी कार्रवाई
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति लाभुकों को भ्रमित करता है या आवेदन प्रक्रिया को लेकर गलत जानकारी देता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि आम लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें। खासकर भूमिहीन लाभुकों को आवेदन के लिए कहां जाना है और किस प्रक्रिया के तहत आवेदन करना है, इसकी स्पष्ट जानकारी स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराई जाए।
CO की बढ़ी जिम्मेदारी, लापरवाही पर सख्ती
गुरुवार की समीक्षा बैठक से यह स्पष्ट है कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग अब अंचल स्तर पर होने वाले कामों की जवाबदेही सीधे अंचलाधिकारियों से तय करने के मूड में है। जमाबंदी सुधार से लेकर नामांतरण और भूमिहीनों के आवेदन तक, सभी राजस्व कार्यों में CO की भूमिका को महत्वपूर्ण बनाया गया है।
बैठक में विभागीय अधिकारी मोना झा, संयुक्त सचिव गिरधारी लाल, डॉ. सुनील कुमार, संजय कुमार सिंह, मणिभूषण किशोर, नवाजिश अख्तर, अनुपम प्रकाश, अविनाश कुमार, जूही कुमारी और आनंद शंकर सहित सारण, सुपौल और पश्चिम चंपारण के सभी अंचलाधिकारी मौजूद रहे।
कुल मिलाकर विभाग का नया निर्देश यह है कि जमीन के रिकॉर्ड में गड़बड़ी सामने आने के बाद अधिकारी केवल आवेदन आने की प्रतीक्षा न करें, बल्कि खुद पहल कर उसका समाधान करें। वहीं काम में लापरवाही या अत्यधिक आवेदन रिजेक्ट करने पर संबंधित CO की जवाबदेही भी तय होगी।





