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Bihar News : घर में नोटों की गड्डियां, सास के नाम करोड़ों की संपत्ति! बिहार के इंजीनियर के यहां छापेमारी में बड़ा खुलासा

Bihae के इंजीनियर नारद दास के ठिकानों पर EOU की छापेमारी में 52.20 लाख रुपये नकद, गहने और संपत्ति के दस्तावेज मिले। आय से अधिक संपत्ति के आरोप में जांच जारी।

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Tejpratap
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Bihar News : बिहार में सरकारी अधिकारियों की संपत्ति और कथित भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर बड़ा मामला सामने आया है। इस बार आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की कार्रवाई के घेरे में योजना एवं विकास विभाग में तैनात कार्यपालक अभियंता नारद कुमार दास आए हैं। मुंगेर में पदस्थापित इंजीनियर के पटना, मुजफ्फरपुर, मुंगेर और भागलपुर स्थित ठिकानों पर छापेमारी के दौरान नकदी, गहने, जमीन-मकान के दस्तावेज और निवेश से जुड़े कागजात बरामद किए गए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, इंजीनियर पर अपनी ज्ञात वैध आय से करीब 83.53 लाख रुपये अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है।


सबसे चौंकाने वाली बरामदगी मुजफ्फरपुर स्थित उनके ससुराल के एक फ्लैट से हुई, जहां से 50.50 लाख रुपये नकद मिले। नोटों की गड्डियों की संख्या इतनी थी कि उनकी गिनती के लिए मशीन मंगानी पड़ी। सरकारी पद पर बैठे एक अधिकारी के परिवार से जुड़े ठिकाने पर इतनी बड़ी नकदी मिलने के बाद जांच एजेंसी अब संपत्ति और पैसों के स्रोत की पड़ताल कर रही है। हालांकि, बरामदगी और आरोपों के आधार पर ही किसी को दोषी नहीं माना जा सकता। मामले में जांच के निष्कर्ष और अदालत की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होंगे।


ईओयू ने गुरुवार को नारद दास से जुड़े पांच ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की। मुजफ्फरपुर के काजी मोहम्मदपुर इलाके में स्थित राधिका अपार्टमेंट के फ्लैट से मिली नकदी के अलावा मुंगेर के कासिम बाजार स्थित बंगाली टोला में उनके किराये के आवास की भी तलाशी ली गई। वहां से 1.70 लाख रुपये नकद, करीब 30 लाख रुपये मूल्य के गहने, एक हुंडई आई-10 स्पोर्ट्स कार और एक मोटरसाइकिल से संबंधित जानकारी सामने आई। ज्वेलरी की खरीद से जुड़ी रसीदें भी जांच एजेंसी के हाथ लगी हैं।


मामले में पटना के रूपसपुर स्थित कुसुमपुरम मोहल्ले का एक मकान भी जांच के दायरे में है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मकान की कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये आंकी गई है और यह इंजीनियर की सास बीना विद्यार्थी के नाम पर खरीदा गया है। बताया गया है कि मकान की खरीद इसी साल हुई थी। इसके लिए लगभग 3.9 डिसमिल जमीन 50 लाख रुपये में खरीदी गई, जबकि उसका सरकारी मूल्य 68.41 लाख रुपये बताया गया है। जांच के दौरान इंजीनियर की पत्नी के बैंक खाते से रकम के लेन-देन से संबंधित प्रमाण मिलने की बात भी सामने आई है। अब एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि संपत्ति खरीदने में इस्तेमाल की गई रकम कहां से आई और उसका संबंध इंजीनियर की घोषित आय से क्या है।


छापेमारी के दौरान नारद दास के विभिन्न बैंकों में मौजूद चार खातों में कुल 17,15,688 रुपये मिलने की जानकारी दी गई है। ईओयू ने इन खातों की राशि फ्रीज करा दी है। इसके अलावा आदित्य बिरला और जीवन बीमा से जुड़े निवेश के दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। भागलपुर स्थित पैतृक आवास से जमीन के प्लॉट खरीदने से संबंधित कागजात और लगभग पांच लाख रुपये मूल्य के आभूषणों की खरीद की रसीदें मिलने की बात कही गई है।


ईओयू की कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में की गई है। एजेंसी के अनुसार, नारद दास पर 83.53 लाख रुपये की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है, जो उनकी ज्ञात वैध आय से करीब 65 प्रतिशत अधिक बताई गई है। इस मामले में उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज किया गया है। जांच का मुख्य सवाल यही है कि सरकारी सेवा से प्राप्त आय और सामने आई संपत्ति के बीच का अंतर कैसे बना।


नारद दास मूल रूप से भागलपुर के तिलकामांझी इलाके में हनुमान पथ के निवासी बताए गए हैं। उन्होंने वर्ष 2014 में जल संसाधन विभाग में सहायक अभियंता के रूप में सरकारी सेवा शुरू की थी। बाद में वह योजना एवं विकास विभाग के स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन के कार्य प्रमंडल, मुंगेर में कार्यपालक अभियंता के पद पर तैनात हुए। करीब 12 साल की सरकारी सेवा के दौरान अर्जित संपत्ति अब जांच एजेंसी की पड़ताल के केंद्र में है।


इस कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और अधिकारियों की संपत्ति की निगरानी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। ससुराल के फ्लैट से लाखों रुपये नकद मिलने से लेकर सास के नाम पर करोड़ों के मकान तक, जांच में सामने आए तथ्य मामले को गंभीर बनाते हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि ईओयू की जांच में पैसों के स्रोत, संपत्तियों के वास्तविक मालिकाना हक और बैंक लेन-देन को लेकर क्या निष्कर्ष निकलते हैं। फिलहाल, नारद दास पर लगे आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिय के बाद ही होगी।