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Bihar News: बिहार में 15 दिनों में बिजली कनेक्शन, देर होने पर कंपनियों पर होगा जुर्माना

Bihar News: बिहार के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है. अब राज्य में बिजली वितरण कंपनियां बिजली कनेक्शन देने में मनमानी नहीं कर सकेंगी. ग्रामीण इलाकों में अधिकतम 15 दिनों के भीतर बिजली कनेक्शन प्रदान करना अनिवार्य होगा.

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Viveka Nand
4 मिनट

Bihar News: बिहार के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब राज्य में बिजली वितरण कंपनियां बिजली कनेक्शन देने में मनमानी नहीं कर सकेंगी। बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने वितरण कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि महानगर क्षेत्रों में तीन दिन, नगर निगम क्षेत्रों में सात दिन और ग्रामीण इलाकों में अधिकतम 15 दिनों के भीतर बिजली कनेक्शन प्रदान करना अनिवार्य होगा। यदि इन समय सीमाओं का उल्लंघन होता है, तो संबंधित बिजली कंपनी को प्रतिदिन 1,000 रुपये का जुर्माना देना होगा।


पिछले वर्ष बिहार बिजली कंपनी ने विद्युत विनियामक आयोग के समक्ष याचिका दायर की थी, जिसमें आम जनता को बेहतर सुविधा देने के लिए बिहार बिजली सप्लाई कोड 2007 में आठवें संशोधन का प्रस्ताव रखा गया था। इसके बाद आयोग ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर आम जनता और हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां मांगी थीं। जनसुनवाई के दौरान कई नागरिक, संस्थाएं और गैर सरकारी संगठन अपनी राय रखने पहुंचे, जिनका आयोग ने गंभीरता से विचार किया।


आयोग ने निर्णय में कहा है कि बिजली कनेक्शन, नामांतरण, भार में वृद्धि या कमी जैसी सेवाओं के लिए आवेदन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से किए जा सकेंगे। इसके लिए एक समर्पित वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप विकसित किया जाएगा। ऑनलाइन आवेदन के तुरंत बाद आवेदक को रजिस्ट्रेशन नंबर मिलेगा, जबकि ऑफलाइन आवेदन 24 घंटे के अंदर पोर्टल पर अपलोड कर रजिस्ट्रेशन नंबर प्रदान किया जाएगा। आवेदकों को अपनी आवेदन की स्थिति ऑनलाइन ट्रैक करने की सुविधा भी मिलेगी।


10 किलोवाट तक के नए कनेक्शन के लिए अब केवल पहचान पत्र जमा करना होगा। यदि पहचान पत्र में कनेक्शन स्थल का पता स्पष्ट है, तो अलग से स्वामित्व प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं होगी। यह कदम उपभोक्ताओं के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने और समय बचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।


पटना में मेट्रो रेल परियोजना भी तेजी से आगे बढ़ रही है। सरकार ने 15 अगस्त से शहर के एक हिस्से में मेट्रो ट्रेन सेवा शुरू करने का लक्ष्य रखा है। मेट्रो संचालन के लिए बिजली दर निर्धारित करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड ने विनियामक आयोग के समक्ष एक याचिका दायर की है, जिसमें मेट्रो को रेलवे की तरह नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि रेलवे 24 घंटे संचालित होता है और मालवाहक सेवा के लिए सब्सिडी पाता है, जबकि मेट्रो केवल यात्री सेवा प्रदान करेगा और रात 11 बजे से सुबह 6 बजे तक बंद रहेगा।


आयोग ने 26 जून तक इस याचिका पर जनता से सुझाव मांगे हैं और 30 जून को याचिका पर सुनवाई आयोजित करेगा। इससे बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुविधा बढ़ेगी, साथ ही पटना मेट्रो परियोजना के सफल संचालन में भी मदद मिलेगी। बिहार सरकार ने बिजली आपूर्ति में सुधार के लिए तकनीकी निवेश बढ़ाने की योजना भी बनाई है, जिसमें स्मार्ट मीटरिंग और डिजिटल बिलिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही बिजली चोरी रोकने और विद्युत सुरक्षा मानकों को कड़ाई से लागू करने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे। इन उपायों से राज्य में बिजली की गुणवत्ता और उपभोक्ता संतुष्टि में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है।