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बिहार विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष में भिडंत, जमकर हुई नोंक -झोंक; हंगामे के बीच सदन हुआ स्थगित

बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन छात्र आंदोलन का मुद्दा गरमा गया। राजद विधायक आलोक मेहता ने छात्रों पर गोलीबारी और गिरफ्तारी का आरोप लगाया, जबकि सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों का विरोध करते हुए निंदा प्रस्ताव लाने की मांग कर दी।

बिहार विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष में भिडंत, जमकर हुई नोंक -झोंक; हंगामे के बीच सदन हुआ स्थगित
Tejpratap
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पटना: बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन सदन की कार्यवाही शुरू होते ही छात्र आंदोलन का मुद्दा गरमा गया। विपक्ष ने छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई, गोलीबारी और गिरफ्तारी का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। वहीं सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों का कड़ा विरोध किया और विधायकों व पत्रकारों पर हुए हमले की निंदा करते हुए सदन में निंदा प्रस्ताव लाने की मांग कर दी। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिससे सदन का माहौल काफी देर तक गरमाया रहा।


राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ विधायक आलोक मेहता ने कार्यवाही शुरू होते ही अपनी सीट से खड़े होकर कहा कि छात्र आंदोलन के दौरान कल कई छात्रों पर गोली चलने की सूचना मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया, उन्हें प्रताड़ित किया गया और बड़ी संख्या में गिरफ्तार भी किया गया। उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले पर जवाब देने की मांग की।


आलोक मेहता जब अपना पक्ष रख रहे थे, तभी सत्ता पक्ष के कुछ विधायक उनके आरोपों का विरोध करने लगे। इस दौरान सदन में शोर-शराबा बढ़ गया। विरोध के बीच आलोक मेहता ने सत्ता पक्ष के विधायकों की ओर इशारा करते हुए कहा, "आप शांत रहिए, आप छात्र विरोधी हैं। छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश मत कीजिए।"


उन्होंने आगे कहा कि बिहार सरकार छात्रों के साथ अन्याय कर रही है। उनका आरोप था कि सिर्फ बिहार ही नहीं बल्कि दिल्ली तक छात्रों पर अत्याचार हो रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले छात्रों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है। सरकार को छात्रों की बात सुननी चाहिए, न कि उन्हें डराने और गिरफ्तार करने का काम करना चाहिए।


विपक्ष के इन आरोपों के बाद सत्ता पक्ष भी आक्रामक हो गया। कई विधायक अपनी सीटों से खड़े होकर विरोध जताने लगे। सत्ता पक्ष की ओर से कहा गया कि विपक्ष तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहा है और सदन को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।


सत्ता पक्ष के विधायक राजू तिवारी ने अध्यक्ष से हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा कि सदन में इस पूरे मामले को लेकर निंदा प्रस्ताव लाया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के घटनाक्रम में विधायकों, पत्रकारों और अन्य लोगों पर हमला किया गया, जो किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं हो सकता।


राजू तिवारी ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों के साथ भी दुर्व्यवहार हुआ और कई जनप्रतिनिधियों को निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि यदि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला होगा तो उसकी कड़ी निंदा होनी चाहिए। उन्होंने अध्यक्ष से आग्रह किया कि पूरे मामले पर सदन अपनी स्पष्ट राय रखे।


सत्ता पक्ष के विधायकों ने यह भी कहा कि इसे छात्र आंदोलन कहना उचित नहीं है। उनका दावा था कि कुछ राजनीतिक दल छात्रों को आगे कर अपने राजनीतिक हित साधने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वास्तविक छात्रों की आड़ में कुछ असामाजिक तत्व माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।


दूसरी ओर विपक्ष लगातार सरकार से छात्रों पर हुई कथित कार्रवाई का जवाब मांगता रहा। विपक्षी सदस्यों ने कहा कि यदि छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाता तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। सदन में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और नारेबाजी के कारण कुछ समय तक कार्यवाही प्रभावित रही।


बिहार में छात्र आंदोलन को लेकर पहले से ही राजनीतिक माहौल गर्म है। ऐसे में विधानसभा के भीतर भी इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दिए। एक ओर विपक्ष सरकार पर छात्र विरोधी होने का आरोप लगा रहा है, वहीं सत्ता पक्ष आंदोलन के पीछे राजनीतिक साजिश होने का दावा कर रहा है। अब इस मुद्दे पर सरकार की ओर से क्या आधिकारिक जवाब आता है और आगे सदन में क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।