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बिहार में 21 जनवरी तक चलेगा एग्री स्टैक महाअभियान: यूनिक किसान ID से PM किसान सहित सभी योजनाओं का मिलेगा सीधा लाभ

हर किसान को डिजिटल बनाने के लिए बिहार में एग्री स्टैक महाअभियान 21 जनवरी तक चलेगा। जिसके माध्यम से पीएम किसान सहित सभी योजनाओं का सीधा लाभ मिलेगा। यूनिक किसान आईडी से तेज होगा डीबीटी, ऋण–बीमा और आपदा सहायता

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किसानों के लिए ऐतिहासिक मौका
© social media
Jitendra Vidyarthi
5 मिनट

PATNA: राज्य सरकार ने बिहार के किसानों को केंद्र एवं राज्य सरकार की सभी कृषि योजनाओं का लाभ सुगम, पारदर्शी और समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। भारत सरकार की एग्री स्टैक (डिजिटल एग्रीकल्चर इकोसिस्टम) पहल को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग तथा कृषि विभाग ने संयुक्त रूप से ठोस निर्णय लिए हैं। इस योजना का लाभ सभी किसानों को उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अब पंचायतों में शिविर की तिथि 21 जनवरी तक विस्तारित कर दी गई है। राज्य सरकार का मानना है कि यह महाभियान किसानों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है। फॉर्मर आईडी बनाने से न केवल उनकी आय बढ़ेगी बल्कि किसान से संबंधित समस्त डाटा का शुद्धिकरण और डिजिटलीकरण भी सुनिश्चित होगा।


बिहार के उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि एग्री स्टैक महाअभियान बिहार के किसानों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। यूनिक किसान आईडी के माध्यम से पीएम किसान सहित केंद्र एवं राज्य सरकार की सभी योजनाओं का लाभ किसानों तक सीधे, पारदर्शी और समयबद्ध रूप से पहुँचेगा। यह अभियान न केवल डीबीटी व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि किसानों को ऋण, बीमा और आपदा सहायता जैसी सुविधाएँ भी सहजता से उपलब्ध कराएगा। राज्य सरकार का संकल्प है कि हर किसान डिजिटल कृषि व्यवस्था से जुड़े, उसकी आय बढ़े और वह आत्मनिर्भर बने। इसी उद्देश्य से इसके शिविर की तिथि 21 जनवरी तक विस्तारित की गई है।


राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव श्री सीके अनिल तथा कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार, राज्य के सभी रैयती किसानों को यूनिक किसान आईडी (आधार की तर्ज पर) प्रदान किए जाने के लिए 6 जनवरी से सभी जिलों में शिविर का आयोजन किया जा रहा है। प्रथम चरण में 9 जनवरी तक ही शिविर के आयोजन की योजना थी। इसे अब बढ़ाकर 21 जनवरी तक कर दिया गया है। इसके माध्यम से पीएम किसान योजना की राशि 75 लाख से अधिक किसानों के जनधन खातों में सीधे भेजी जा सकेगी। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) को मजबूती मिलेगी।


एग्री स्टैक के तहत किसानों के भूमि अभिलेख, जमाबंदी, फसल विवरण, कृषि इनपुट, ऋण और बीमा से संबंधित समस्त जानकारी को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा। इससे किसानों को न केवल सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिलेगा, बल्कि ऋण और बीमा प्रक्रियाएं भी सरल होंगी तथा आपदा सहायता का त्वरित निपटारा संभव हो सकेगा। सरकार का मानना है कि एग्री स्टैक से कृषि क्षेत्र में नवाचार को भी बढ़ावा मिलेगा। स्टार्टअप्स, एफपीओ (Farmer Producer Organizations) और अन्य संस्थाएं किसानों के साथ अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेंगी। दीर्घकाल में इसका उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि और समग्र कृषि विकास को सुनिश्चित करना है।


इस क्रम में राज्य के सभी समाहर्ताओं सह जिला पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जिला स्तर पर कृषि एवं राजस्व विभाग के बीच नियमित साप्ताहिक समन्वय बैठक आयोजित की जाए। साथ ही, किसानों की अद्यतन जमाबंदी और भू-अभिलेखों के शुद्धिकरण को प्राथमिकता दी जाए। पंचायत और हल्का स्तर पर कैंप लगाकर किसानों को जागरूक करने तथा अद्यतन जमाबंदी, नक्शा डिजिटलीकरण और जियो-रेफरेंसिंग को एग्री स्टैक से अनिवार्य रूप से जोड़ने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त डीबीटी व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए सभी जिलों में बैंकों को निर्देश दिया गया है कि जिन किसानों का जनधन खाता अभी तक नहीं खुला है, उनका खाता अनिवार्य रूप से खुलवाया जाए। राज्य सरकार ने सभी जिलों से अपेक्षा की है कि वे इस अभियान को मिशन मोड में सफल बनाएं, ताकि बिहार का किसान डिजिटल कृषि व्यवस्था से जुड़कर आत्मनिर्भर और सशक्त बन सके।