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Bihar News: जारी हुआ पीरपैंती थर्मल पावर प्लांट का टेंडर, हजार एकड़ जमीन अधिग्रहण भी पूरा

Bihar News: पीरपैंती में 2400 MW थर्मल पावर प्लांट का टेंडर जारी, 21,400 करोड़ की लागत से बिहार बनेगा ऊर्जा आत्मनिर्भर। जानिए इस परियोजना के बारे में पूरी जानकारी और इसके फायदे भी।

Bihar News
प्रतीकात्मक
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Deepak Kumar
Deepak Kumar
3 मिनट

Bihar News: बिहार के भागलपुर जिले के पीरपैंती में 2400 मेगावाट क्षमता का एक नया ग्रीनफील्ड थर्मल पावर प्लांट स्थापित होने जा रहा है। 21,400 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह परियोजना बिहार में निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा निवेश है। बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड ने इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसमें 25 जून 2025 तक एजेंसियां भाग ले सकती हैं।


11 जुलाई को तकनीकी बोली और 16 जुलाई को वित्तीय बोली खोली जाएगी, जिसमें डीप पोर्टल पर इ-रिवर्स नीलामी के जरिए सबसे कम बोली लगाने वाली एजेंसी को यह मेगा प्रोजेक्ट सौंपा जाएगा। केंद्र सरकार की टैरिफ पॉलिसी 2016 के तहत मंजूरी प्राप्त इस परियोजना के लिए कोल इंडिया से कोयला आवंटन और 1020.60 एकड़ जमीन का अधिग्रहण पहले ही पूरा हो चुका है।


यह परियोजना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरदर्शी ऊर्जा नीति का परिणाम है, जिसका उद्देश्य बिहार को बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है। वर्तमान में बिहार को अपनी बिजली जरूरतों के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे लागत बढ़ती है। यह पावर प्लांट चालू होने के बाद बिजली की खरीद पर निर्भरता कम होगी और आम जनता को सस्ती दरों पर विश्वसनीय बिजली मिलेगी।


इस थर्मल पावर प्लांट के बनने से बिहार को कई फायदे होंगे। यह परियोजना न केवल बिजली की लागत कम करेगी बल्कि निर्माण और संचालन के दौरान हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा करेगी। सस्ती बिजली की उपलब्धता से औद्योगिक इकाइयों को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे राज्य में निवेश और आर्थिक विकास को गति मिलेगी। बता दें कि पहले सौर ऊर्जा संयंत्र का प्रस्ताव था, लेकिन तकनीकी सर्वेक्षण के बाद थर्मल पावर प्लांट को अधिक व्यवहार्य माना गया। कोयले की उपलब्धता और अनुकूल जमीन ने इस निर्णय को और भी मजबूती दे दी।


आने वाले समय में यह पावर प्लांट बिहार के विकास में एक नया अध्याय जोड़ेगा और अगले 15-20 वर्षों तक राज्य की बिजली जरूरतों को बिना किसी रुकावट के पूरा करेगा। वैसे यह परियोजना बिहार को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी या नहीं ये तो समय ही बताएगा।