ब्रेकिंग
पटना-गोरखपुर वंदे भारत पर फिर पथराव, सुगौली में टूटा कोच का शीशा; चलती ट्रेन में मची अफरा-तफरीBihar News : 'पहले बेरहमी से पीटा, फिर घोंट दी सांस'... ईओ विमल कुमार हत्याकांड की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोले रोंगटे खड़े कर देने वाले राजबिहार में आंगनवाड़ी व्यवस्था में बड़ा बदलाव! अब सूखा राशन नहीं, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मिलेगा न्यूट्री प्रीमिक्स आहारBihar News : अब हर गांव में मिलेगा जीविका दीदियों का बाजार! बिहार में 203 हाट बनाने की तैयारी, सुधा मॉडल पर सरकार का बड़ा फैसलाBihar weather: बिहार में बारिश का रेडार एक्टिव! 10 जिलों पर खतरे की घंटी, 2 में ऑरेंज अलर्ट, जानें आपके जिले का हालपटना-गोरखपुर वंदे भारत पर फिर पथराव, सुगौली में टूटा कोच का शीशा; चलती ट्रेन में मची अफरा-तफरीBihar News : 'पहले बेरहमी से पीटा, फिर घोंट दी सांस'... ईओ विमल कुमार हत्याकांड की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोले रोंगटे खड़े कर देने वाले राजबिहार में आंगनवाड़ी व्यवस्था में बड़ा बदलाव! अब सूखा राशन नहीं, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मिलेगा न्यूट्री प्रीमिक्स आहारBihar News : अब हर गांव में मिलेगा जीविका दीदियों का बाजार! बिहार में 203 हाट बनाने की तैयारी, सुधा मॉडल पर सरकार का बड़ा फैसलाBihar weather: बिहार में बारिश का रेडार एक्टिव! 10 जिलों पर खतरे की घंटी, 2 में ऑरेंज अलर्ट, जानें आपके जिले का हाल

Bihar News : थाना भी नहीं संभाल पा रही बिहार पुलिस! पहले कैदी भागते थे, अब नाबालिग लड़की ने भी दिया ऐसा चकमा कि पुलिस देखती रह गई

भागलपुर के रसलपुर थाना से महिला पुलिस की निगरानी में रखी गई नाबालिग लड़की फरार हो गई। लगातार हो रही फरारी की घटनाओं से बिहार पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

Bihar News : थाना भी नहीं संभाल पा रही बिहार पुलिस! पहले कैदी भागते थे, अब नाबालिग लड़की ने भी दिया ऐसा चकमा कि पुलिस देखती रह गई
Tejpratap
Tejpratap
6 मिनट

भागलपुर: बिहार पुलिस की कार्यशैली पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इस बार जो हुआ उसने लोगों को हैरान कर दिया। अब तक पुलिस कस्टडी से कैदियों के फरार होने की खबरें आती थीं, मगर इस बार तो कहानी ने नया मोड़ ले लिया। एक नाबालिग लड़की, जिसे पुलिस खुद सुरक्षा में रखे हुए थी, उसी ने थाने से ऐसा "एग्जिट" लिया कि पूरा थाना हाथ मलता रह गया। अब सवाल उठ रहा है कि जब थाना ही सुरक्षित नहीं रहा, तो सुरक्षा का भरोसा आखिर किस पर किया जाए?

खुद थाने पहुंची, फिर थाने से ही गायब हो गई

मामला भागलपुर जिले के रसलपुर थाना क्षेत्र का है। 20 जुलाई को शादी की नीयत से कथित अपहरण की शिकार हुई एक नाबालिग लड़की, पुलिस के बढ़ते दबाव के बीच सोमवार को खुद थाने पहुंच गई थी। पुलिस ने राहत की सांस ली और तय किया कि मंगलवार को उसे न्यायालय में पेश कर बयान दर्ज कराया जाएगा।

लेकिन इससे पहले ही पूरा मामला उल्टा पड़ गया। महिला पुलिस की निगरानी में रखी गई नाबालिग लड़की पुलिस को चकमा देकर थाना परिसर से ही फरार हो गई। जब तक पुलिस को इसकी भनक लगी, तब तक वह आंखों से ओझल हो चुकी थी।

थाने में सुरक्षा थी या सिर्फ औपचारिकता?

यहीं से सवालों की लंबी सूची शुरू होती है। आखिर एक नाबालिग लड़की थाना परिसर से कैसे निकल गई? क्या उसकी निगरानी सिर्फ कागजों में हो रही थी? क्या महिला पुलिसकर्मी सतर्क थीं या सब कुछ भगवान भरोसे चल रहा था?अगर कोई व्यक्ति थाने से ही आराम से निकल जाए, तो यह सिर्फ एक घटना नहीं बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। आखिर वह मुख्य गेट तक कैसे पहुंची? क्या किसी ने उसे रोकने की कोशिश नहीं की? या फिर पूरे सिस्टम ने मान लिया था कि "थाना है, यहां से कौन भागेगा?"

पुलिस का जवाब भी वही पुराना... तलाश जारी है

रसलपुर थानाध्यक्ष अजीत कुमार का कहना है कि नाबालिग को कोर्ट में बयान के लिए रखा गया था। वह महिला पुलिस की निगरानी में थी, लेकिन पुलिस को चकमा देकर फरार हो गई। अब उसकी तलाश की जा रही है।यानि घटना हो चुकी है, अब तलाश जारी है। सवाल यह है कि अगर निगरानी मजबूत होती तो तलाश की नौबत ही क्यों आती?

मां ने दर्ज कराया था अपहरण का केस

नाबालिग की मां ने पहले ही एक महिला समेत छह लोगों के खिलाफ शादी की नीयत से अपहरण का मामला दर्ज कराया था। ऐसे में लड़की का दोबारा गायब होना जांच को और उलझा सकता है। पुलिस अब उसे ढूंढने के साथ-साथ पूरे घटनाक्रम की भी पड़ताल कर रही है।

ये पहली बार नहीं... भागने वालों की सूची लंबी होती जा रही है

अगर कोई सोच रहा है कि यह इकलौती घटना है, तो तस्वीर कुछ और है। बिहार में पुलिस अभिरक्षा से फरार होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। हाल ही में वैशाली जिले के हाजीपुर में इलाज के लिए अस्पताल लाया गया एक नाबालिग कैदी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। उसे मोटरसाइकिल चोरी के आरोप में पकड़ा गया था, लेकिन अस्पताल पहुंचते ही वह पुलिस की पकड़ से निकल गया। इतना ही नहीं, छह दिन पहले भी हाजीपुर में एक आरोपी पुलिस वाहन से भाग निकला था। आरोपी सूरज कुमार ने चलती गाड़ी में पुलिसकर्मी को धक्का दिया, हथकड़ी सरकाई और कूदकर फरार हो गया। पुलिस सिर्फ उसे भागते हुए देखती रह गई।

हर बार एक ही कहानी... "फरार हो गया, तलाश जारी है"

हर घटना के बाद लगभग एक जैसा बयान सामने आता है—"आरोपी फरार हो गया है, तलाश की जा रही है।" लेकिन सवाल यह है कि आखिर ऐसी नौबत बार-बार क्यों आ रही है? क्या सुरक्षा व्यवस्था में कहीं बड़ी चूक है? क्या संवेदनशील मामलों में भी निगरानी के मानकों का पालन नहीं हो रहा? या फिर जिम्मेदारी तय करने की बजाय सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है?

जनता पूछ रही है... जवाब कौन देगा?

यह घटना सिर्फ एक नाबालिग लड़की के फरार होने की नहीं है। यह उस व्यवस्था का आईना है, जहां पुलिस की अभिरक्षा में मौजूद लोग भी सुरक्षित नहीं रह पा रहे। अगर थाना परिसर से कोई बिना रोक-टोक निकल सकता है, अस्पताल से कैदी फरार हो सकता है और चलती गाड़ी से आरोपी पुलिस को धक्का देकर भाग सकता है, तो जनता का यह सवाल बिल्कुल जायज है—क्या बिहार पुलिस की सबसे बड़ी चुनौती अब अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि पकड़े गए लोगों को संभालकर रखना बन गई है? फिलहाल पुलिस नाबालिग की तलाश में जुटी है। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था और पुलिस की सतर्कता पर ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब सिर्फ "तलाश जारी है" से नहीं दिया जा सकता।