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भागलपुर में कैसे टूटा राघोपुर बांध? 250 मजदूर और 20 नावें राहत-बचाव कार्य में जुटीं, DM-SSP कर रहे निगरानी

भागलपुर के खरीक प्रखंड में गंगा नदी के बढ़ते दबाव से काजीकोरैया-राघोपुर बांध का करीब 30 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। कटाव रोकने के लिए 2.50 लाख बालू की बोरियां, 20 नावें, 16 ट्रैक्टर, जेसीबी और करीब 250 मजदूर राहत कार्य में जुटे हैं।

Bihar Flood News
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Mukesh Srivastava
4 मिनट

Bihar Flood News: बिहार के भागलपुर जिले के खरीक प्रखंड में गंगा नदी के बढ़ते दबाव के बीच काजीकोरैया-राघोपुर मार्जिनल बांध का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। नदी में बने टापू (शोल) के कारण धारा का रुख बांध की ओर मुड़ने और लगातार बढ़ते जलस्तर से बांध पर दबाव बढ़ गया था। तेज कटाव के बाद 23-24 अगस्त की रात राघोपुर बांध-सह-रेलवे टैगिंग बांध करीब 30 मीटर की लंबाई में क्षतिग्रस्त हुआ।



स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जल संसाधन विभाग की टीमें युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। भागलपुर के खरीक प्रखंड में गंगा नदी के बाएं तट पर करीब 6.50 किलोमीटर लंबा काजीकोरैया-राघोपुर मार्जिनल बांध बना हुआ है। मानसून की शुरुआत से ही नदी की मुख्य धारा का बांध पर लगातार दबाव बना हुआ था।



नदी के बीच में शोल यानी टापू बनने के कारण पानी की धारा का रुख सीधे बांध की ओर हो गया। जलस्तर बढ़ने के साथ अंडरमाइनिंग के कारण बांध के D-Nose के पास 26 जुलाई को करीब 110 मीटर लंबाई में कटाव शुरू हुआ था। 27 जुलाई को कटिहार के मुख्य अभियंता और भागलपुर बाढ़ नियंत्रण अंचल के अधीक्षण अभियंता की निगरानी में रात-दिन राहत कार्य चलाकर सुबह करीब 4 बजे कटाव पर काबू पाया गया था।



बचाव कार्य के तहत 110 मीटर लंबे और 6 मीटर चौड़े NC बेस पर बैंबू रोल और ‘हाथी पांव’ का इस्तेमाल किया गया। सुरक्षा के लिए D-Nose के अपस्ट्रीम में 250 मीटर तक हर 10 मीटर की दूरी पर कुल 25 ‘स्लोपिंग बेड बार’ भी बनाए गए थे।



23 अगस्त की रात से E-Nose के डाउनस्ट्रीम में नदी का दबाव और बढ़ गया। इसके बाद तेज कटाव के कारण 24 अगस्त की रात करीब 2 बजे राघोपुर बांध-सह-रेलवे टैगिंग बांध का करीब 30 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया।



पहले कटाव के बाद से ही एक सहायक अभियंता और चार कनीय अभियंताओं की मूल तैनाती के अलावा शिफ्ट के आधार पर एक अतिरिक्त सहायक अभियंता और दो कनीय अभियंताओं की टीम भी लगाई गई थी।वहीं, 17 अगस्त से अधीक्षण अभियंता, कार्यपालक अभियंता और सहायक अभियंता की विशेष टीम लगातार मौके पर कैंप कर स्थिति की निगरानी कर रही है।



क्षतिग्रस्त हिस्से के दोनों किनारों को स्थिर करने और पानी के फैलाव को रोकने के लिए रिंग बांध का निर्माण शुरू कर दिया गया है। विभाग की टीमें लगातार कटाव को नियंत्रित करने और तटबंध को सुरक्षित करने में जुटी हैं। राहत कार्य में करीब 2.50 लाख बालू भरी बोरियां, 20 नावें, 16 ट्रैक्टर, एक पोकलेन, दो जेसीबी और करीब 250 मजदूर लगाए गए हैं। मजदूर और विभागीय टीमें दिन-रात काम कर रही हैं।



भागलपुर के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) खुद मौके का निरीक्षण कर रहे हैं और स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है। प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट हैं।



गंगा के जलश्राव की तेजी से निकासी के लिए फरक्का बराज के महाप्रबंधक (GM) को पत्र भेजा गया है। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री से फोन पर बातचीत कर फरक्का बराज के सभी गेट खोलने का अनुरोध किया है। फिलहाल प्रशासन का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है और बांध के क्षतिग्रस्त हिस्से को सुरक्षित करने के लिए युद्धस्तर पर काम जारी है।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता