1st Bihar Published by: HARERAM DAS Updated Tue, 06 Jan 2026 04:01:42 PM IST
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Bihar News: नव वर्ष की शुरुआत ईश्वर की भक्ति से करने निकले बलिया के तीन युवक अपने घरों में फिर कभी लौटकर नहीं आए। "पूजा कर के जल्दी लौट आएंगे…घर से निकलते वक्त यही शब्द थे। किसी ने नहीं सोचा था कि यह तीन दोस्तों की आख़िरी विदाई होगी। नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर में पूजा-पाठ के लिए गए बलिया के तीन युवकों की सड़क हादसे में मौत की खबर ने पूरे इलाके को अंदर तक हिला दिया है। जिन घरों में कुछ दिन पहले नए साल की खुशियां थीं, वहां अब सन्नाटा और मातम पसरा हुआ है।
परिजनों के अनुसार 4 जनवरी की शाम करीब 4 बजे तीनों से आख़िरी बार फोन पर बात हुई थी। आवाज़ों में सामान्य खुशी थी। इसके बाद फोन बंद हुआ, संदेश नहीं पहुंचे और हर गुजरता घंटा बेचैनी बढ़ाता गया। पूरी रात इंतज़ार के बाद जब अगले दिन भी कोई सूचना नहीं मिली, तो परिजनों ने इंटरनेट पर तलाश शुरू की। नेपाली मीडिया में सड़क हादसे की खबर देखकर परिजनों के हाथ कांप उठे- और तभी सच सामने आ गया।
इस हादसे ने बलिया के तीन परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। गिट्टू कुमार, अरविंद कुमार उर्फ भाई जी और रजनीश कुमार उर्फ गोल्डन- तीनों अपने-अपने परिवार के मजबूत सहारे थे। कोई व्यवसाय संभाल रहा था, कोई दुकान चला रहा था, तो कोई पिता के साथ खेती-बाड़ी में हाथ बंटाता था। आज तीनों घरों में चूल्हे ठंडे हैं और आंखें सूखने का नाम नहीं ले रहीं।
मृतकों की पहचान बलिया थाना क्षेत्र अंतर्गत मेंसेरपुर पंचायत के शादीपुर करारी निवासी अधिवक्ता रमेश सिंह के 40 वर्षीय पुत्र गिट्टू कुमार, लखमीनिया स्टेशन रोड स्थित सेठानी धर्मशाला के निवासी मदन मोहन प्रसाद के 44 वर्षीय पुत्र रजनीश कुमार उर्फ गोल्डन तथा स्वर्गीय मोहन दास के 50 वर्षीय पुत्र अरविंद कुमार उर्फ भाई जी के रूप में हुई है।
बताया जाता है कि 4 जनवरी की शाम नेपाल के मकवानपुर जिले के भीमफेदी क्षेत्र में काठमांडू से हेटौडा जा रही टाटा सुमो जीप अनियंत्रित होकर करीब 100 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। जीप में सवार नौ लोगों में से छह की मौत हो गई। इनमें बलिया के ये तीन युवक भी शामिल थे। जिस यात्रा पर निकलते वक्त भगवान के दर्शन की बात हो रही थी, वही यात्रा जिंदगी का आखिरी सफर बन गई।
हादसे की सूचना मिलते ही 5 जनवरी की रात परिजन बदहवास हालत में नेपाल रवाना हुए। वहां पहुंचकर जब तीनों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हुई, तो परिजन खुद को संभाल नहीं सके। पोस्टमार्टम के बाद नेपाल सरकार ने शव सौंप दिए हैं। शवों को बलिया लाया जा रहा है, जहां अंतिम दर्शन के बाद उनका अंतिम संस्कार पैतृक गांवों में किया जाएगा।
एक साथ तीन युवकों की मौत ने पूरे बलिया क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। बाजार, गली-मोहल्ले और दुकानों में सन्नाटा पसरा है। हर जुबान पर बस एक ही सवाल है- ईश्वर की भक्ति के लिए निकले ये लोग ऐसी मौत के शिकार क्यों हुए? समाचार लिखे जाने तक शव बलिया नहीं पहुंच सके थे।