Bihar Crime News: बेगूसराय जिले के बहुचर्चित होमगार्ड जवान मंटून राय हत्याकांड में करीब नौ साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-11 मनोज कुमार की अदालत ने शनिवार, 22 अगस्त 2026 को सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए तीन दोषियों चंदन सिंह, नंदन सिंह और विमल राय को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. अदालत ने तीनों पर अलग-अलग धाराओं में कुल 35 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है.
मामला रतनपुर थाना क्षेत्र के पिपरा-इटवा तीनमुहान रोड का है, जहां 4 अप्रैल 2017 को होमगार्ड जवान मंटून राय की हत्या कर दी गई थी. घटना के बाद पुलिस ने मामले में कुल 12 लोगों को नामजद आरोपी बनाया था. जांच के बाद चंदन सिंह, नंदन सिंह, विमल राय और सावित्री देवी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था. हालांकि, मुकदमे की सुनवाई के दौरान सावित्री देवी की मृत्यु हो गई.
तीन धाराओं में सुनाई गई सजा
अदालत ने धारा 302/149 भादवि के तहत तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और प्रत्येक पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया. वहीं धारा 120बी भादवि के तहत तीन वर्ष सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 27 आर्म्स एक्ट के तहत तीन वर्ष सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई.
2018 में गठित हुए थे आरोप
मामले की सुनवाई सत्र वाद संख्या 9/18 के तहत अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-11 की अदालत में हुई. 27 नवंबर 2018 को आरोपियों के खिलाफ धारा 302, 149, 120बी भादवि और 27 आर्म्स एक्ट के तहत आरोप गठित किए गए थे.
अभियोजन पक्ष की ओर से मामले में कुल आठ गवाहों की गवाही कराई गई. मृतक के भाई और सूचक प्रमोद राय के अलावा राजीव राय, शंभू राय, अशोक राय, अनिल राय और सुधीर राय ने अदालत में गवाही दी. इसके अलावा मामले के अनुसंधानकर्ता अमित कुमार और चिकित्सक डॉ. कुमार सिंह की भी गवाही दर्ज हुई.
परिजनों ने नहीं छोड़ी कानूनी लड़ाई
मामले की सुनवाई के दौरान मृतक के परिजनों को गवाही से रोकने के लिए कथित तौर पर धमकी और दबाव दिए जाने की बात भी सामने आई. इसके बावजूद परिवार ने कानूनी लड़ाई जारी रखी. मृतक के भाइयों और पुत्र ने अदालत में पहुंचकर अपनी गवाही दर्ज कराई.
परिजनों की गवाही को मामले में अहम कड़ी माना गया. लंबी सुनवाई के बाद 12 अगस्त 2026 को अदालत ने चंदन सिंह, नंदन सिंह और विमल राय को दोषी करार दिया था. इसके बाद 22 अगस्त को सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई और तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई.
मामले में अभियोजन की ओर से अधिवक्ता गोपाल कुमार साहू ने पैरवी की. वहीं, सूचक की ओर से वरीय अधिवक्ता प्रमोद कुमार ने अदालत में पक्ष रखा. सुनवाई के दौरान गवाहों की गवाही और मामले से जुड़े साक्ष्यों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया.
मंटून राय हत्याकांड में अदालत का यह फैसला मृतक के परिवार के लिए करीब नौ साल लंबे इंतजार के बाद आया है. वर्ष 2017 में हुई हत्या के बाद शुरू हुई कानूनी प्रक्रिया कई वर्षों तक चली. अब अदालत ने मामले में दोषी ठहराए गए तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है.
शुरुआत में मामले में 12 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था. पुलिस जांच के बाद चार आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था, जिनमें से सावित्री देवी की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई. मामले में तीन आरोपियों को अदालत ने दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है.
बेगूसराय से हरेराम दास की रिपोर्ट





