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BIHAR NEWS : 12 साल में ही जर्जर हुआ करोड़ों का पुल! खंभों से बाहर निकला सरिया, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा

बेतिया के नरकटियागंज-रामनगर मार्ग पर बलोर नदी का पुल महज 12 साल में जर्जर हो गया है। पिलर का कंक्रीट टूटने से सरिया बाहर आ गया है। ग्रामीणों ने बड़े हादसे की आशंका जताते हुए तत्काल मरम्मत की मांग की है।

BIHAR NEWS : 12 साल में ही जर्जर हुआ करोड़ों का पुल! खंभों से बाहर निकला सरिया, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
Tejpratap
Tejpratap
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BIHAR NEWS : पश्चिम चंपारण जिले के नरकटियागंज-रामनगर मुख्य मार्ग पर बलोर नदी पर बना पुल महज 12 वर्षों में ही जर्जर अवस्था में पहुंच गया है। पुल के एक प्रमुख पिलर का कंक्रीट टूटकर गिरने लगा है और उसके भीतर लगा लोहे का सरिया बाहर दिखाई दे रहा है। पुल की इस बदहाल स्थिति ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इसकी मरम्मत और तकनीकी जांच नहीं कराई गई तो आने वाले दिनों में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।


स्थानीय लोगों के अनुसार, यह पुल क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और प्रतिदिन हजारों लोग इसी रास्ते से आवाजाही करते हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में मालवाहक वाहन भी इसी मार्ग से गुजरते हैं। पुल की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है, लेकिन अब तक इसके रखरखाव को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।


जानकारी के मुताबिक, बलोर नदी पर बने इस पुल का उद्घाटन वर्ष 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने किया था। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित इस पुल को क्षेत्र के विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण परियोजना माना गया था। हालांकि निर्माण के केवल 12 साल बाद ही पुल के खंभों का क्षतिग्रस्त होना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रहा है।


ग्रामीण अमजद अली, मोहम्मद दिलशाद और मोहम्मद अब्बास ने बताया कि पुल के पूर्वी हिस्से का एक पिलर नीचे से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। पिलर का कंक्रीट उखड़ने के कारण उसके अंदर लगा लोहे का सरिया खुलकर बाहर आ गया है। उनका कहना है कि स्थिति दिन-प्रतिदिन और गंभीर होती जा रही है, लेकिन संबंधित विभाग की ओर से अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।


ग्रामीणों ने बताया कि बलोर नदी एक पहाड़ी नदी है, जिसमें बरसात के दौरान तेज बहाव और बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। मानसून के दिनों में नदी का जलस्तर काफी बढ़ जाता है और पुल के पिलरों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ऐसे में पहले से कमजोर हो चुके पिलर किसी भी समय खतरे का कारण बन सकते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि भारी वाहनों की आवाजाही इसी तरह जारी रही तो पुल की संरचना को और नुकसान पहुंच सकता है।


क्षेत्रवासियों का कहना है कि पुल की स्थिति को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराया गया है, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। लोगों ने मांग की है कि पुल की तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए और विशेषज्ञों की टीम भेजकर इसकी वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए।


मामले को लेकर पुल निर्माण विभाग के जूनियर इंजीनियर पिंकू कुमार ने बताया कि पुल के क्षतिग्रस्त होने की सूचना विभाग के उच्च अधिकारियों को दे दी गई है। उन्होंने कहा कि जल्द ही तकनीकी टीम मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करेगी और रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। विभाग की ओर से मरम्मत और सुरक्षा संबंधी कदम उठाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।


फिलहाल स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी चिंता आगामी मानसून को लेकर है। उनका कहना है कि बारिश शुरू होने के बाद नदी में जलस्तर बढ़ेगा और पुल पर दबाव भी बढ़ जाएगा। ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही जान-माल के लिए खतरा साबित हो सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन और पुल निर्माण विभाग से मांग की है कि किसी संभावित दुर्घटना से पहले पुल की मरम्मत कर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।