1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sun, 04 Jan 2026 02:29:09 PM IST
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Jija saali love affair : बिहार के अरवल जिले से एक ऐसी प्रेम कहानी सामने आई है, जिसने रिश्तों की पारंपरिक परिभाषा और सामाजिक मर्यादाओं को झकझोर कर रख दिया है। कुर्था थाना क्षेत्र में अप्रैल में होने वाली शादी से पहले ही युवक का दिल अपनी होने वाली साली पर आ गया। परिजनों के विरोध, समाज की लोक-लाज और तय रिश्तों को दरकिनार करते हुए प्रेमी जोड़े ने खरमास के दौरान कुर्था के प्राचीन सूर्य मंदिर में विवाह रचा लिया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
मामला कुर्था थाना क्षेत्र के भतूबिगहा गांव निवासी आदित्य कुमार से जुड़ा है। आदित्य की शादी सबलकसराय गांव की एक युवती से तय हुई थी। करीब तीन महीने पहले दोनों परिवारों ने पूरे रीति-रिवाज और धूमधाम से सगाई की थी। अप्रैल महीने में विवाह की तिथि भी तय कर दी गई थी और दोनों परिवार शादी की तैयारियों में जुटे हुए थे। इसी बीच एक ऐसा मोड़ आया, जिसने इस रिश्ते की दिशा ही बदल दी।
बताया जा रहा है कि सगाई के बाद आदित्य की मोबाइल पर अपनी होने वाली पत्नी से बातचीत होती थी। बातचीत के दौरान उसकी छोटी बहन से भी कभी-कभी बात हो जाती थी। यह छोटी बहन जहानाबाद में रहकर पढ़ाई कर रही थी। शुरुआत में यह बातचीत सामान्य पारिवारिक दायरे में ही थी, लेकिन धीरे-धीरे आदित्य और होने वाली साली के बीच बातचीत बढ़ने लगी। फोन कॉल और मैसेज के जरिए दोनों एक-दूसरे के करीब आते चले गए।
समय के साथ यह रिश्ता सामान्य बातचीत से आगे बढ़कर प्रेम में बदल गया। दोनों ने महसूस किया कि वे एक-दूसरे के बिना नहीं रह सकते। उधर अप्रैल में बड़ी बहन से शादी की तारीख नजदीक आती जा रही थी, लेकिन आदित्य का मन अब तय रिश्ते से हट चुका था। जब परिजनों को इस प्रेम संबंध की भनक लगी तो घर में विरोध शुरू हो गया। दोनों परिवारों ने इस रिश्ते को गलत और अस्वीकार्य बताते हुए साफ मना कर दिया।
परिजनों के विरोध और सामाजिक दबाव के बावजूद आदित्य और युवती अपने फैसले पर अडिग रहे। दोनों ने तय किया कि वे समाज की परवाह किए बिना साथ रहेंगे। इसी फैसले के तहत दोनों घर से निकल पड़े और कुर्था पहुंचे। इसके बाद मामला कुर्था थाने तक पहुंच गया। पुलिस ने दोनों से पूछताछ की और उनकी उम्र व सहमति की पुष्टि करने के बाद मामले को शांतिपूर्वक सुलझाने का प्रयास किया।
पुलिस के हस्तक्षेप के बाद दोनों को स्थानीय प्राचीन सूर्य मंदिर भेजा गया। यहीं पर पंडित सतीश पाण्डेय ने वैदिक रीति-रिवाज और मंत्रोच्चार के साथ दोनों का विवाह संपन्न कराया। खास बात यह रही कि यह विवाह खरमास के महीने में हुआ, जिसे परंपरागत रूप से विवाह के लिए अशुभ माना जाता है। इसके बावजूद मंदिर में शादी होते देख सैकड़ों ग्रामीण मौके पर जुट गए। मंदिर परिसर में लोगों की भीड़ लग गई और हर कोई इस अनोखी शादी को लेकर तरह-तरह की चर्चा करता नजर आया।
शादी के दौरान भावनात्मक माहौल भी देखने को मिला। युवक और युवती की माताओं की आंखों में आंसू थे। वे इस पूरे घटनाक्रम से आहत और दुखी नजर आईं। जहां एक ओर प्रेमी जोड़ा अपने फैसले से संतुष्ट दिखाई दिया, वहीं दूसरी ओर परिजन इस नए रिश्ते को अभी तक पूरी तरह स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि, मंदिर में वैदिक रीति से हुई शादी को झुठलाना भी उनके लिए आसान नहीं है।
इस घटना के बाद पूरे इलाके में ‘साली-जीजा’ की इस शादी की चर्चा जोरों पर है। कोई इसे सच्चे प्यार की जीत बता रहा है तो कोई इसे रिश्तों की मर्यादा के खिलाफ कदम मान रहा है। फिलहाल, यह अनोखी प्रेम कहानी अरवल जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है और समाज के सामने रिश्तों, प्रेम और परंपरा को लेकर कई सवाल खड़े कर रही है।