Bihar Politics : पटना स्नातक सीट से विधान पार्षद नीरज कुमार और जदयू के बाहुबली विधायक अनंत सिंह के बीच चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों नेताओं के बीच सियासी टकराव अब पार्टी के अंदर भी चर्चा का बड़ा विषय बन चुका है। एक तरफ अनंत सिंह लगातार नीरज कुमार पर अपने विरोध का आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी तरफ पार्टी नेतृत्व इस विवाद को सुलझाने की कोशिश में जुटा है। लेकिन अब इस पूरे मामले में केंद्रीय मंत्री और मुंगेर सांसद ललन सिंह की भूमिका को लेकर ही नया सवाल खड़ा हो गया है।
दरअसल, अनंत सिंह का आरोप है कि नीरज कुमार ने अलग-अलग मौकों पर चार बार उनका विरोध किया है। यही वजह है कि इस बार पटना स्नातक सीट के एमएलसी चुनाव में उन्होंने नीरज कुमार का विरोध करने का खुला ऐलान कर दिया है। अनंत सिंह के इस रुख से जदयू के भीतर सियासी समीकरण को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
मामला तब और दिलचस्प हो गया, जब पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को दी गई है। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह माना जाने लगा कि ललन सिंह दोनों नेताओं के बीच सुलह कराने के लिए पहल कर सकते हैं।
लेकिन अब छोटे सरकार के नाम से चर्चित अनंत सिंह ने खुद साफ कर दिया है कि इस मामले में ललन सिंह की तरफ से उन्हें कोई संदेश नहीं मिला है। एक मीडिया चैनल से बातचीत में अनंत सिंह ने कहा कि केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने उन्हें पिछले करीब एक महीने से कोई फोन नहीं किया है।यानी जिस विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी ललन सिंह को दिए जाने की बात कही जा रही थी, उसमें फिलहाल उनकी सक्रियता नजर नहीं आ रही है। अनंत सिंह के बयान के बाद यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या ललन सिंह ने इस पूरे विवाद से खुद को दूर कर लिया है?
हालांकि, ललन सिंह पहले ही इस मामले को दोनों नेताओं का निजी विवाद बता चुके हैं। उनका कहना था कि अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच जो मामला है, उसमें उन्हें कुछ नहीं कहना है। अब बीती रात अपने लोकसभा क्षेत्र में एक कार्यक्रम के दौरान ललन सिंह ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया, जिसने उनके रुख को और साफ कर दिया। ललन सिंह ने कहा कि वह किसी की पैरवी नहीं करते हैं, क्योंकि कई बार किसी के लिए प्यार या पैरवी करने से मामला और बिगड़ जाता है। उनके इस बयान को अनंत-नीरज विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ललन सिंह इस पूरे मामले में खुलकर सामने क्यों नहीं आ रहे हैं? अनंत सिंह लगातार दावा कर रहे हैं कि नीरज कुमार ने उनका चार बार विरोध किया और दो बार ललन सिंह का भी विरोध किया। ऐसे में अनंत सिंह के ताजा बयान और ललन सिंह की दूरी ने इस विवाद को और दिलचस्प बना दिया है।
फिलहाल तस्वीर यही है कि पार्टी नेतृत्व सुलह की कोशिश की बात कर रहा है, लेकिन जमीन पर दोनों नेताओं के बीच दूरी कम होती नहीं दिख रही। वहीं, ललन सिंह की चुप्पी ने इस विवाद में एक नया सियासी सवाल खड़ा कर दिया है—क्या ललन सिंह सच में अनंत और नीरज के विवाद से दूरी बनाए रखना चाहते हैं, या फिर पर्दे के पीछे कोई ऐसी सियासी गणित चल रही है, जिसका खुलासा अभी बाकी है?





