ब्रेकिंग न्यूज़

Bhagalpur Shiv Corridor : बिहार का पहला शिव कॉरिडोर बनने का रास्ता साफ, इस जगह जल्द शुरू होगा काम Bihar politics news : जेल में बंद विधायक अनंत सिंह को बड़ी राहत: कोर्ट ने किया बरी, RJD प्रवक्ता बंटू सिंह भी निर्दोष करार दिए गए BPSC teacher recruitment : BPSC को नहीं मिल रही वेकेंसी, बिहार में आरक्षण रोस्टर में फंसी शिक्षकों की बहाली; पढ़िए क्या है पूरा अपडेट husband time sharing : पंचायत का अनोखा फैसला, पति को दो पत्नियों के बीच बंटवारा, इस दिन रहेगी छुट्टी Bihar news : पटना NEET छात्रा मौत मामले में SIT लगातार एक्टिव, ब्रह्मेश्वर मुखिया की बहू ने कहा - 26 तक है इंतजार, उसके बाद होगा... Bihar Police : मारब सिक्सर के 6 गोली..: इसी गाने पर डांस करती दिखीं बिहार की कई महिला जवान, पुलिस कैंप का वीडियो वायरल Patna NEET student case : बिना पर्चे कैसे मिली नींद की गोली, ट्रेन छोड़ स्कॉर्पियो से क्यों पटना आई छात्रा; SIT जांच में नया एंगल; जानिए नीट छात्रा मामले में क्या है नया अपडेट Patna encounter : पटना में लॉरेंस गैंग के गुर्गे का एनकाउंटर, पैर में गोली लगने के बाद गिरफ्तार; 36 से अधिक केस दर्ज Bihar Aaj Ka Mausam: बिहार में ठंड और कोहरे से राहत, अगले एक हफ्ते मौसम रहेगा साफ मुजफ्फरपुर: मनीष राज हत्याकांड का सनसनीखेज खुलासा, कुख्यात कन्हाई ठाकुर समेत 6 गिरफ्तार

Chandra Grahan 2025: इस दिन लग रहा है चंद्रग्रहण, 100 वर्षों के बाद बन रहा है ऐसा संयोग; जानिए...

Chandra Grahan 2025: साल 2025 का दूसरा और बेहद खास पूर्ण चंद्र ग्रहण 7 सितंबर को पड़ रहा है, जो पितृ पक्ष के दौरान घटित होगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह ग्रहण न केवल खगोलीय दृष्टि से, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी बेहद शक्तिशाली माना जा रहा है।

Chandra Grahan 2025

02-Sep-2025 02:21 PM

By First Bihar

Chandra Grahan 2025: साल 2025 का दूसरा और बेहद खास पूर्ण चंद्र ग्रहण 7 सितंबर को पड़ रहा है, जो पितृ पक्ष के दौरान घटित होगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह ग्रहण न केवल खगोलीय दृष्टि से, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी बेहद शक्तिशाली माना जा रहा है। यह ग्रहण 100 वर्षों में एक बार आने वाला विशेष संयोग है, जो रविवार की रात 9:58 बजे से शुरू होकर 8 सितंबर की रात 1:26 बजे तक चलेगा। इस दौरान चंद्रमा "ब्लड मून" के रूप में दिखाई देगा, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आकर उसकी रोशनी रोक देती है।


सनातन धर्म के अनुसार, ग्रहण काल में शुभ कार्य, पूजा-पाठ और मंदिर प्रवेश वर्जित होता है, क्योंकि इस समय नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक होता है। मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और ग्रहण के बाद शुद्धिकरण व धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।


ग्रहण के समय भोजन विषाक्त हो सकता है, इसलिए पकाए गए भोजन में तुलसी के पत्ते डालने की परंपरा है। वहीं, यह समय आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इस दौरान जपे गए मंत्रों का प्रभाव हजार गुना अधिक होता है। विशेषकर महामृत्युंजय और गायत्री मंत्र का जाप लाभकारी माना गया है। गर्भवती महिलाओं को इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, जिसमें घर के अंदर रहें, ग्रहण न देखें, नुकीली वस्तुओं का प्रयोग न करें, और सोने के बजाय जाप या प्रार्थना करें।ग्रहण समाप्त होने के बाद गंगाजल से स्नान, कपड़े व घर की सफाई, तथा दान-पुण्य और ईश्वर का स्मरण करना शुभ माना गया है। यह ग्रहण केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि एक ऐसा आध्यात्मिक अवसर है जो आत्मशुद्धि और पूर्वजों के प्रति सम्मान का प्रतीक भी है।