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11-Jan-2026 02:47 PM
By FIRST BIHAR
Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति को साल के पहले बड़े पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण की शुरुआत मानी जाती है। मान्यताओं के अनुसार सूर्य का उत्तरायण होना शुभ संकेत है और अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक माना जाता है।
दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि और उत्तरायण को सकारात्मकता का प्रतीक कहा गया है। मकर संक्रांति के बाद दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं, जिससे जीवन में नई ऊर्जा और शुभ शुरुआत का संकेत मिलता है।
इस बार मकर संक्रांति को लेकर लोगों में असमंजस था। कहीं इसे 14 जनवरी, तो कहीं 15 जनवरी को मनाने की चर्चा थी। पंचांग के अनुसार 14 जनवरी 2026 को दोपहर 3 बजकर 7 मिनट पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे, और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन ही मकर संक्रांति मनाना उचित रहेगा। सूर्य का संक्रमण दोपहर बाद होने की वजह से तिथि को लेकर भ्रम पैदा हुआ।
इस वर्ष संक्रांति और षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है। करीब 23 साल बाद यह संयोग है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन का दान, स्नान और पूजा विशेष फलदायी होता है। मकर संक्रांति का महापुण्यकाल दोपहर 3:07 बजे से शाम 6 बजे तक रहेगा।
मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन स्नान के बाद तिल, गुड़, चावल और वस्त्रों का दान किया जाता है। हालांकि इस बार एकादशी होने के कारण चावल से बनी खिचड़ी को लेकर संशय है। विद्वानों के अनुसार एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित होता है, इसलिए खिचड़ी पर्व 15 जनवरी (द्वादशी) को मनाना अधिक उचित बताया गया है।