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06-Feb-2026 12:43 PM
By FIRST BIHAR
PATNA: पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री संतोष सुमन को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज एक आपराधिक मामले में निचली अदालत द्वारा संज्ञान लेने के आदेश को रद्द कर दिया है। संतोष मांझी पर एक पुलिस अधिकारी के साथ मारपीट और एक महिला से छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया था।
निचली अदालत के फैसले को दी थी चुनौती
दरअसल, बिहार सरकार के मंत्री संतोष मांझी ने साल 2021 में गया के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी द्वारा पारित उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ कई गंभीर धाराओं में संज्ञान लिया गया था। इनमें दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा, सरकारी आदेश की अवहेलना, रास्ता रोकना, मारपीट, गंभीर चोट, महिला से जबरन कपड़े उतरवाने का प्रयास, अपहरण, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना सहित आईपीसी, बिहार पुलिस एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धाराएं शामिल थीं।
याचिकाकर्ता संतोष मांझी के वकीलों की ओर से हाई कोर्ट में दलील दी गई कि मंत्री संतोष मांझी को राजनीतिक द्वेष के कारण झूठे मामले में फंसाया गया है। उनके वकील ने कहा कि घटना के समय वह केवल सभा को संबोधित कर रहे थे और उनके खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा या अपराध का कोई ठोस सबूत नहीं है। यह भी कहा गया कि संज्ञान लेने का आदेश बिना साक्ष्य और बिना सोच-विचार के पारित किया गया है। वहीं राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध किया गया, लेकिन यह भी स्वीकार किया गया कि संतोष मांझी के खिलाफ सिर्फ इतना ही आरोप है कि वह सभा को संबोधित कर रहे थे।
कोर्ट ने माना आरोप गलत हैं
मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस संदीप कुमार ने कहा कि एफआईआर और दोनों पक्षों की दलीलों को देखने से स्पष्ट है कि संतोष मांझी पर किसी प्रकार के हमले का आरोप नहीं है। केवल सभा को संबोधित करना अभियोजन के आरोपों को साबित नहीं करता। हाईकोर्ट ने इसी आधार पर 12 फरवरी 2021 को गया के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी द्वारा संतोष मांझी के संबंध में पारित आदेश को रद्द कर दिया।
क्या था आरोप
संतोष मांझी के खिलाफ दर्ज एफआईआर के अनुसार, बोधगया थाना प्रभारी को डोमुहाने चौक पर सड़क जाम की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचने पर पुलिस ने देखा कि कुछ लोग टायर जला रहे थे और लाठी-डंडे के साथ हंगामा कर रहे थे। आरोप था कि संतोष मांझी समेत कुछ अन्य लोग लाउडस्पीकर से सभा को संबोधित कर रहे थे और 2017 के एक पुराने मामले में गिरफ्तारी नहीं होने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे।
एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया कि बाद में भीड़ भड़क गई, एक बुर्का पहने महिला का अपमान किया गया, थाना प्रभारी के साथ मारपीट हुई और कुछ उपद्रवियों ने एक टेंपो पर भी हमला किया। इसके बाद सड़क जाम हटाया गया और संतोष मांझी सहित कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद मंत्री संतोष मांझी को बड़ी कानूनी राहत मिली है, हालांकि अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला आगे जारी रहेगा।