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02-Oct-2021 08:14 PM
PATNA: चुनाव आयोग ने आज लोजपा का सिंबल फ्रीज कर दिया है। आयोग ने आदेश दिया है कि चिराग पासवान या पशुपति पारस में से कोई भी लोक जनशक्ति पार्टी के नाम का उपयोग नहीं करेगा। आयोग का ये अंतरिम आदेश आज जारी किया गया है। अब इसकी इनसाइड स्टोरी सामने आयी है। नीतीश कुमार को बिहार में होने वाले उप चुनाव में चिराग पासवान का डर सता रहा था। लिहाजा बकायदा आयोग में गुहार लगायी गयी थी कि लोजपा का नाम और सिंबल दोनों फ्रीज कर दिया जाये।
पशुपति पारस के जरिये खेला गया दांव
दरअसल पशुपति कुमार पारस ने चार दिन पहले यानि 28 सितंबर को चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखी थी. उन्होंने कहा था कि बिहार में उप चुनाव होने वाले हैं औऱ उन्हें आशंका है कि चिराग पासवान इस उप चुनाव में लोजपा के नाम और सिंबल का उपयोग कर सकते हैं. पारस ने कहा था कि वे पार्टी के अध्यक्ष हैं. चुनाव आयोग इस पर सुनवाई कर रहा है कि लोजपा का असली अध्यक्ष कौन है. ऐसे में किसी गुट को उप चुनाव में लोजपा का नाम औऱ सिंबल उपयोग करने का अधिकार नहीं होना चाहिये. पारस ने चुनाव आयोग से तत्काल प्रभाव से लोजपा का नाम और सिंबल दोनों फ्रीज करने की गुहार लगायी थी. चार दिनों के भीतर आयोग का फैसला आ गया.
चुनाव आयोग के फैसले के बाद पटना पहुंचे पशुपति कुमार पारस ने मीडिया से कहा
“मैंने चुनाव आयोग से गुहार लगायी थी कि पार्टी का नाम और सिंबल फ्रीज कर दिया जाये. मुझे आशंका थी कि चिराग पासवान बिहार में होने वाले उप चुनाव में पार्टी के नाम और सिंबल का दुरूपयोग कर सकते हैं. इसलिए मैंने आयोग से गुहार लगायी थी. मेरी अर्जी पर चुनाव आयोग ने सिंबल फ्रीज कर दिया है.”
पशुपति पारस ने कहा कि चिराग पासवान एलान कर रहे हैं कि वे उप चुनाव में अपने कैंडीडेट खड़ा करेंगे. जबकि लोजपा तो नीतीश कुमार के साथ है. वे मजबूती के साथ नीतीश कुमार के उम्मीदवारों की मदद करेंगे. उनके पक्ष में प्रचार करेंगे.
नीतीश का डर
जेडीयू और लोजपा (पारस) से जुड़े नेता सिंबल फ्रीज होने के पीछे की पूरी कहानी बता रहे हैं. दरअसल जैसे ही बिहार में दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव का एलान हुआ वैसे ही चिराग पासवान ने घोषणा कर दी कि वे अपना उम्मीदवार खडा करेंगे. इसके बाद नीतीश कुमार औऱ उनके सिपाहसलार बेचैनी में आ गये. 2020 के विधानसभा चुनाव में वे चिराग पासवान के कैंडीडेट उतारने से जेडीयू के हश्र को भूले नहीं हैं. उप चुनाव में फिर यही डर सताने लगा.
सूत्र बताते हैं कि नीतीश कुमार को तत्काल यही रास्ता सूझा कि पार्टी का सिंबल ही जब्त करा दिया जाये. इसके बाद पशुपति पारस से बात की गयी. उन्हें कहा गया कि वे चुनाव आयोग जायें और सिंबल फ्रीज करने की मांग करें. नीतीश का फरमान मिलते ही पारस चुनाव आयोग पहुंच गये. 28 सितंबर को उन्होंने चुनाव आयोग में अर्जी लगायी और तीन दिन बाद फैसला आ गया. चिराग अब ना तो पार्टी यानि लोजपा के नाम पर उम्मीदवार खडा कर सकते हैं और ना ही बंगला छाप सिंबल का यूज कर सकते हैं. चुनाव आयोग ने उनसे कहा है कि वे 4 अक्टूबर तक अपनी पार्टी के लिए नया नाम बतायें औऱ तीन सिंबल भी बतायें जिनमें से एक उन्हें दिया जायेगा.
वैसे आयोग का ये अंतरिम आदेश है. जैसे ही बिहार में उप चुनाव निपटेगा वैसे ही चुनाव आय़ोग फिर से इस पर सुनवाई करेगा कि लोजपा का असली अध्यक्ष कौन है. चिराग पासवान या पशुपति पारस. चुनाव आय़ोग के आखिरी फैसले के बाद सिंबल को फ्रीज करने का फैसला वापस भी लिया जा सकता है.