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09-Feb-2020 10:41 AM
PATNA : दिल्ली विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल ने अरविंद केजरीवाल सरकार की वापसी के संकेत दिए हैं। 2 दिन बाद चुनाव नतीजे भी सामने आ जाएंगे लेकिन दिल्ली में रहकर पिछले महीने भर से अपनी जेब ढीली करने वाले बिहार के नेता अब वापस लौटने लगे हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए बिहार से गए नेताओं के वापस आने का सिलसिला शुरू हो गया है। बिहार से जेडीयू और बीजेपी के नेता और कार्यकर्ता बड़ी तादाद में दिल्ली गए थे।
दिल्ली चुनाव प्रचार के लिए जाने वाले ज्यादातर नेता ऐसे थे जो इसी साल बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव का टिकट चाहते हैं। जेडीयू और बीजेपी के अंदर टिकट के दावेदारों में दिल्ली में खूब पसीना बहाया। होटल में कमरे लेकर कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ ठहरे और दिल्ली में चक्कर लगाने के लिए गाड़ियों पर भी मोटी रकम खर्च की। अनौपचारिक बातचीत में बिहार के नेता केजरीवाल के लिए मैदान को साफ बताते रहे लेकिन सवाल अपनी टिकट कन्फर्म होने का था लिहाजा नेताजी अपने समर्थकों के साथ दिल्ली की गलियों की खाक छानते रहे। दिल्ली में ज्यादातर बिहारी नेताओं की तरह बहाया गया पसीना पार्टी के लिए नहीं बल्कि अपने खुद के लिए था।
दिल्ली में चुनाव प्रचार कर वापस लौटे नेताओं से फर्स्ट बिहार झारखंड ने जब उनके दिल्ली प्रवास को लेकर खर्च की बाबत जानकारी ली तो यह अंदाजा लगा कि हर छोटे-बड़े नेता ने तकरीबन 2 लाख से ज्यादा की रकम खर्च कर दी। चुनाव प्रचार के दौरान इन नेताओं का पूरा फोकस अपने सोशल मीडिया अकाउंट और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए फोटो शेयर करने पर रहा। दिल्ली में प्रचार करने वाले नेता जी यह चाहते थे कि उनके आका को इस बात की जानकारी हो जाए कि दिल्ली के चुनाव प्रचार में किसने कितना पसीना बहाया। नेता आपने टिकट की जुगाड़ में जेब ढीली करते रहे लेकिन सबसे ज्यादा पौ बारह उन कार्यकर्ताओं और समर्थकों की रही जो नेताजी के बूते दिल्ली में घूमते रहे। होटल में रहना, गाड़ियों से चक्कर लगाना और फिर नेताजी के साथ फोटो अपलोड कर लेना समर्थकों के लिए किसी हॉलिडे ट्रिप से कम नहीं था। टिकट के दावेदार ऐसे नेताओं की सबसे ज्यादा तादाद जेडीयू और बीजेपी के अंदर रही लेकिन आरजेडी एलजेपी जैसी पार्टियों में ऐसे नेता ना के बराबर दिखे। आरजेडी और एलजेपी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को शायद इस बात का अंदाजा है था दिल्ली में पसीना बहाने की बजाय पार्टी सुप्रीमो की परिक्रमा से ही टिकट मिल सकता है। अब इंतजार इस बात का है कि दिल्ली में पसीना बहाकर आने वाले कितने नेताओं को बिहार चुनाव में आसानी से टिकट मिल पाता है।