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20-Oct-2020 08:07 PM
PATNA : स्व. रामविलास पासवान के श्राद्ध में आज जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहुंचे तो भावुक चिराग पासवान ने उनके पैर छुए. लेकिन दोनों के बीच औपचारिक बात तक नहीं हुई. दोनों अगल बगल में बैठे रहे लेकिन जुबान खामोश थे. बाद में तेजस्वी आये तो वे भी चिराग की बगल में बैठ गये. चिराग ने तेजस्वी यादव के साथ ही अपना गम बांटा.
लोक जनशक्ति पार्टी के दफ्तर में आयोजित ब्रह्मभोज में पिता के जाने का गम चिराग पासवान की आंखों से झलक रहा था. शाम होती ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चुनाव प्रचार से लौटे और एयरपोर्ट के बगल में स्थिति लोक जनशक्ति पार्टी के प्रदेश कार्यालय पहुंच गये. गमगीन चिराग पासवान ने नीतीश के पैर छुए, लेकिन बात की औपचारिकता भी नहीं हुई. नीतीश कुर्सी पर बैठे और बगल में चिराग भी बैठ गये. लेकिन दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं हुई.
कुछ देर बाद तेजस्वी यादव भी श्राद्ध में पहुंचे. वे भी एयरपोर्ट से सीधे लोजपा कार्यालय पहुंचे. वहां वे चिराग पासवान के बगल में बैठ गये. चिराग के एक ओर नीतीश कुमार तो दूसरी ओर तेजस्वी प्रसाद यादव. चिराग ने अपने बगल में बैठे तेजस्वी यादव बैठे से कई दफे बात की. तो बात हुई, यह किसी को नहीं पता, लेकिन हुई. हल्की आवाज में ही, कई बार तेजस्वी से बात कर चिराग ने मन हल्का किया.
रामविलास पासवान के श्राद्ध में भी नीतीश कुमार और चिराग पासवान के बीच की तल्खी दिख ही गयी. फर्स्ट बिहार के साथ बातचीत में चिराग पासवान कह चुके हैं कि जब रामविलास पासवान का शव दिल्ली से पटना आया था तो श्रद्धांजलि देने पहुंचे नीतीश कुमार ने चिराग पासवान या उनके परिवार की ओर आंख उठा कर भी नहीं देखा था. चिराग ने कहा था कि जब दीघा घाट पर अंतिम संस्कार हो रहा था तो वे नीतीश को प्रणाम करने गये लेकिन वहां भी मुख्यमंत्री ने कोई नोटिस नहीं लिया.
रामविलास पासवान के श्राद्ध कार्यक्रम में मौके पर भी बिहार के सियासत की आगे की तस्वीर दिख गयी. दरअसल चुनाव के बाद सत्ता की चाबी नीतीश, तेजस्वी या चिराग में से किसी एक के पास ही रहने की उम्मीद है. आज जो नजारा दिखा उससे साफ लगा कि अब चिराग और नीतीश के बीच संबंध सामान्य होने के आसार नहीं हैं. इससे पहले भी चिराग पासवान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कड़ी आलोचना करते रहे हैं. लेकिन नीतीश चिराग पासवान के खिलाफ नहीं बोल रहे. इसे उनकी रणनीति का ही एक हिस्सा माना जा रहा है.
उधर तेजस्वी यादव चिराग को लेकर सॉफ्ट रहे हैं. रामविलास पासवान की मौत के बाद उन्होंने पासवान परिवार के साथ खड़े रहने का मैसेज लगातार दिया है. जानकारों की मानें तो सारे राजनेता उस स्थिति की परिकल्पना कर रहे हैं जब त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति आ जाये. तब क्या समीकरण बन सकता है, ये सभी के दिमाग में है.