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प्रमोशन में आरक्षण के मुद्दे पर सियासत तेज, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ संविधान संशोधन की उठी मांग

10-Feb-2020 07:01 AM

DELHI : सरकारी नौकरियों के अंदर प्रमोशन में आरक्षण को मौलिक अधिकार मानने से सुप्रीम कोर्ट ने इंकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब प्रमोशन में आरक्षण का मुद्दा सियासी तौर पर गरमाते जा रहा है। विपक्षी दल पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ गोलबंद हैं। अब एनडीए में शामिल घटक दल भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ संविधान संशोधन की मांग कर रहे हैं। प्रमोशन में आरक्षण के मुद्दे पर जनता दल यूनाइटेड के बाद अब लोक जनशक्ति पार्टी ने भी पुराने नियम को बहाल रखने की जरूरत बताई है।


लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष और सांसद चिराग पासवान ने कहा है कि प्रमोशन में आरक्षण के सवाल पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से वह सहमत नहीं है। चिराग ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटकर आरक्षण की पुरानी व्यवस्था बरकरार रखी जानी चाहिए। एलजेपी अध्यक्ष ने कहा है कि वह इस मामले को आज संसद में उठा सकते हैं। एलजेपी की तरफ से अगर संसद में मामला उठाया जाता है तो चिराग को विपक्षी सदस्यों का भी समर्थन हासिल होगा। आपको बता दें कि केंद्रीय मंत्री और एलजेपी के संस्थापक रामविलास पासवान ने आज रात ही एससी एसटी सांसदों को डिनर पर बुलाया है। माना जा रहा है कि इसमें सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले पर भी बातचीत होगी।


प्रमोशन में आरक्षण के मुद्दे पर जनता दल यूनाइटेड अपने पुराने स्टैंड पर कायम है। जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव और प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा है कि हमारी पार्टी इसका समर्थन करती है। बिहार में इसे लागू भी किया जा चुका है। आपको बता दें कि पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा था कि सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण को मौलिक अधिकार के रूप में नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि न्यायालय किसी भी राज्य सरकार को अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग को प्रमोशन में आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं कर सकती। सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला सुनाते हुए उत्तराखंड हाई कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद मोदी सरकार पर यह दबाव बनने लगा है कि संविधान संशोधन के जरिए। इस फैसले को पलटा जाए।