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25-Jan-2022 01:24 PM
PATNA : देश में चर्चा भले ही पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव की हो रही हो लेकिन चुनावी रणनीतिकार और कभी भारतीय जनता पार्टी के लिए एक काम कर चुके प्रशांत किशोर की नजर 2024 के आम चुनावों पर है. प्रशांत किशोर ने 2024 में मजबूत विपक्षी विकल्प की आवश्यकता बताई है. एक हिंदी चैनल से बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा है कि अगर ईमानदार पहल हो तो मजबूत विपक्षी मोर्चा भारतीय जनता पार्टी को साल 2024 के लोकसभा चुनाव में मात दे सकता है.
प्रशांत किशोर को उम्मीद है कि नीतीश कुमार इसमें बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. नीतीश कुमार के नाम का इस्तेमाल किए बगैर पीके ने कहा है कि अगर कोई व्यक्ति ईमानदारी से प्रयास करता है और हिंदी पट्टी के तमाम राज्यों में क्षेत्रीय दलों को एक साथ ला पाता है तो वैसी स्थिति में 2024 के परिणाम बेहद अलग होंगे.
इंटरव्यू के दौरान प्रशांत किशोर ने बड़ी बेबाकी से कहा है कि बिहार, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, तेलंगाना, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल जैसे राज्यों में तकरीबन 280 सीटें हैं जो विपक्षी मोर्चा जीत सकता है. बीजेपी इन सीटों पर बेहद हल्के अंतर से जीती है और यहां अगर एकजुटता दिखाई जाए तो नतीजे उलट सकते हैं. हालांकि प्रशांत किशोर ने यह भी कहा है कि इसके लिए विपक्षी मोर्चा इमानदारी से बनना चाहिए. मैं इस विपक्षी एकजुटता के लिए प्रयास करना चाहता हूं.
प्रशांत किशोर ने कहा कि भले ही हालिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी जीत हासिल कर ले लेकिन ने 2024 में बीजेपी को हराना कोई मुश्किल काम नहीं होगा. प्रशांत किशोर ने कहा कि आप 5-6 महीने या 1 साल काम करके बीजेपी को नहीं हरा सकते इसके लिए जरूरी है कि आप लगातार साथ काम करें और अगले 5 से 10 साल तक का विजन तैयार करें.
प्रशांत किशोर ने भले ही नीतीश कुमार का नाम नहीं लिया हो लेकिन मैं जिस तरह उन्होंने बिहार की चर्चा की उससे यह साफ है कि पीके के मन में नीतीश कुमार को लेकर कोई प्लानिंग चल रही है. पिछले दिनों यह चर्चा भी राजनीतिक गलियारे में हुई थी कि प्रशांत किशोर और नीतीश कुमार की मुलाकात हो चुकी है. हाल के दिनों में नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड ने कई मोर्चों पर बीजेपी से अलग राय बयां की है. विशेष राज्य का दर्जा एक ऐसा मुद्दा है जिस पर जेडीयू लगातार केंद्र सरकार से सवाल पूछ रहा है.
प्रशांत किशोर ने बड़ी बेबाकी से इस बात को कबूल किया है कि वह कांग्रेस में जाना चाहते थे लेकिन उनकी सोच कांग्रेस से मेल नहीं खा पाई. कांग्रेस से चार-पांच महीने तक उनकी बातचीत होती रही. ममता बनर्जी की पार्टी पश्चिम बंगाल से बाहर निकलना चाहती है. इस बात का खुलासा भी प्रशांत किशोर ने किया. प्रशांत किशोर ने कहा कि वह टीएमसी के साथ काम करते रहेंगे. प्रशांत किशोर चुनावी रणनीति के अलावा राजनीतिक विकल्प देने की तरफ नही ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं. ऐसे में इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि प्रशांत किशोर आने वाले दिनों में नीतीश कुमार के साथ एक बार फिर नज़दीकियां बढ़ा सकते हैं.