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पढ़ाई के जुजून में डेढ़ महीने तक कमरे में लॉक रहा छात्र, बेड के नीचे मोबाइल की रोशनी में काटी रातें

पढ़ाई के जुजून में डेढ़ महीने तक कमरे में लॉक रहा छात्र, बेड के नीचे मोबाइल की रोशनी में काटी रातें

20-Jul-2020 03:03 PM

DESK : पढ़ाई करना बहुत से लोगों को पसंद होता है. ऐसे लोग घंटो किताबों की दुनिया में खोये रह सकते हैं, लेकिन पढ़ाई के लिए होस्टल में कैद हो जाने का पहला मामला सामने आया है. जहां एक छात्र ने लॉक डाउन के दौरान होस्टन बंद होने के बावजूद छुपकर वहां पढ़ाई करता रहा. ये घटना किसी ऐसे वैसे इंस्टिट्यूट की नहीं बल्कि देश की प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक आइआइटी कानपुर की है. 

दरअसल, कोरोना वायरस से फैली महामारी के संक्रमण को रोकने के लिए एहतियातन देश में लॉकडाउन लगा दिया गया था. जिस वजह से सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने का आदेश था. लिहाजा, आइआइटी ने भी अपने सभी छात्र-छात्राओं को छात्रावास खाली कर घर जाने का निर्देश दे दिया. लेकिन गुजरात का रहने वाला एमटेक प्रथम वर्ष का एक छात्र अपने घर नहीं गया. वो अपने घर जाने के बजाये अपने हॉस्टल में ही डेढ़ महीने तक रहा. होस्टल में रहने के लिए उसने संस्थान प्रशासन को भ्रमित कर रखा था. 

वहां रहने के लिए छात्र ने अपने कमरे के दरवाजे पर बाकायदा ताला भी लगा रखा था. इस दौरान उसने न पंखा चलाया और न ही लाइट जलाई. बेड के नीचे मोबाइल की टॉर्च जलाकर पढ़ाई करता रहा और दाल-चावल, बिस्किट व स्नैक्स के सहारे भूख मिटाता रहा. दरवाजे की कुंडी टूटी थी, इसके सहारे दो तीन दिन में चुपचाप कमरे से बाहर निकलता था और किसी को भनक लगने से पहले ही वापस आ जाया करता. उसके इस कारनामे की पोल तब खुली जब एक दिन वो दरवाजा बंद करना भूल गया.    

गुजरात का रहने वाला यह छात्र होस्टल बंद होते समय कमरे के दरवाजे पर ताला लगाकर उसकी एक चाबी जमा कर दी और दूसरी अपने पास रखी. खाना बनाने के लिए इतने दिनों तक उसने इंडक्शन का इस्तेमाल किया.

हाल ही में एक सुरक्षाकर्मी ने जब दरवाजा हल्का खुला देखा तो जांच की. छात्र को कमरे के अंदर देखकर तुरंत अधिकारियों को इसकी सूचना दी. छात्र से जब उसके इस हरकत के बारे में पुछताछ हुई तो उसने बताया कि उसे लगा था कि कुछ ही दिन में लॉकडाउन समाप्त हो जाएगा, लेकिन ये बढ़ता ही गया. बाद में छात्र का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया और उसे उसके घर भेज दिया गया इस बात की जानकारी निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने दी.