Bihar Topper Success Story: नाना के निधन से टूटा मन, फिर भी नहीं हारी हिम्मत, गया की निशु बनी बिहार टॉपर बिहार में अपराधियों का तांडव: बाइक सवार बदमाशों ने कारोबारी को मारी गोली, दिनदहाड़े फायरिंग से हड़कंप बिहार में अवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई: पंचमहला से हथियारबंद दो अपराधी गिरफ्तार, सोनू-मोनू गैंग से जुड़े तार मुजफ्फरपुर की पलक ने इंटर साइंस में 5वां रैंक किया हासिल, जिले और स्कूल का नाम किया रोशन निशांत कुमार का बड़ा बयान: 2005 से पहले बिहार में था दंगा और हिंसा का दौर, पिताजी ने बदली तस्वीर ट्रेनों में तत्काल टिकट के लिए नया सिस्टम लागू, लंबी लाइनों और धोखाधड़ी से मिलेगी राहत ट्रेनों में तत्काल टिकट के लिए नया सिस्टम लागू, लंबी लाइनों और धोखाधड़ी से मिलेगी राहत उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने चाणक्य, अशोक और जरासंध से CM नीतीश की तुलना, कहा–दिल्ली से बिहार को करेंगे गाइड चिराग पासवान ने किया बड़ा खुलासा, मुख्यमंत्री की दौड़ से खुद को बताया बाहर, जानिए… नए सीएम पर क्या बोले? Bihar Transport News: परिवहन विभाग के MVI की गाड़ी और 'भतीजा' के अवैध वसूली का खेल, शिकायत पर गाड़ी जब्त...दो हिरासत में
24-Jan-2020 08:26 PM
PATNA : सूबे के साढ़े तीन लाख से ज्यादा नियोजित शिक्षकों के लिए खुशखबरी है। पटना हाईकोर्ट ने नियोजित शिक्षकों के पक्ष में बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने बिहार सरकार को आदेश दिया है कि वह नियोजित शिक्षकों को हर हाल में देना होगा। दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने ये फैसला सुनाया है।
पटना हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस आशुतोष कुमार की बेंच ने ये फैसला सुनाया है। कोर्ट ने बिहार सरकार को किसी भी कीमत पर बिहार के नियोजित शिक्षकों को भविष्य निधि का लाभ देने का आदेश दिया है। लखन लाल निषाद और अन्य की ओर से कोर्ट में ये याचिका दायर की गय़ी थी। कोर्ट ने कहा कि शिक्षा सचिव ने पहले ही निर्णय लिया था कि इन शिक्षकों को इपीएफ का लाभ दिया जायेगा, लेकिन सरकार का यह निर्णय अभी तक क्रियान्वित नहीं हो पाया है।
बता दें कि इसके पहले अरवल, औरंगाबाद और भोजपुर के नियोजित शिक्षकों की तरफ से पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। तब पटना हाईकोर्ट ने 17 सितम्बर 2019 को अपने आदेश में सभी नियोजित शिक्षकों को ईपीएफ और एमपी एक्ट 1952 का लाभ देने का निर्देश दिया था। तब कोर्ट ने इसे सुनिश्चित करने का जिम्मा ईपीएफओ के क्षेत्रीय पीएफ कमिश्नर को दिया गया था। कार्रवाई के लिए 60 दिनों की मोहलत दी गयी थी। लेकिन कोर्ट के निर्देशों के बावजूद भी नियोजित शिक्षको को इसका लाभ नहीं मिल सका था।