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नेपाल में भूकंप से 129 लोगों की मौत, हजार से अधिक घायल; मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका

नेपाल में भूकंप से 129 लोगों की मौत, हजार से अधिक घायल; मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका

04-Nov-2023 07:34 AM

By First Bihar

DESK : नेपाल में शुक्रवार को रात 11:54 मिनट पर आए 6.4 तीव्रता के भूकंप ने अबतक नेपाल पुलिस के तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक मरने वालों की संख्या 129 जाजरकोट में 92 और रूकुम में 37  से अधिक लोगों की जान ले ली है। इस भूकंप में 1000 से अधिक लोग घायल हो गये हैं। इसके बाद  नेपाल सरकार के मुताबिक राहत और बचाव कार्य जारी है। नेपाल सरकार के प्रवक्ता के मुताबकि प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड प्रभावित इलाकों का आज यानी शनिवार को दौरा करने वाले हैं। 


राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, रात 11:32 बजे आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.4 मापी गई है। भूकंप का केंद्र नेपाल में 28.84 डिग्री अक्षांश और 82.19 डिग्री देशांतर पर जाजरकोट जिले के रमीडांडा में था। यह 10 किमी की गहराई पर था। पिछले एक महीने में नेपाल में 6 से अधिक तीव्रता वाला यह दूसरा भूकंप था।  इससे पहले 3 अक्टूबर को देश में 6.2 तीव्रता का भूकंप आया था। शुक्रवार का भूकंप नेपाल में पिछले आठ सालों में सबसे शक्तिशाली था।  इसके पहले अप्रैल 2015 में आए भूकंप में करीब 10,000 लोग मारे गए थे। 


बताया जा रहा है कि, भूकंप के कारण ज्यादातर लोगों की मौत रुकुम पश्चिम और जाजरकोट में हुई है। मृतकों की जानकारी रुकुम पश्चिम के डीएसपी नामराज भट्टराई और जाजरकोट के डीएसपी संतोष रोक्का ने दी है। नेपाल में तबाही मचाने वाले भूकंप की तीव्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसका असर दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में देखा गया। बिहार के पटना और मध्य प्रदेश के भोपाल तक भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। 


आपको बताते चलें कि, धरती की ऊपरी सतह सात टेक्टोनिक प्लेटों से मिल कर बनी है। जहां भी ये प्लेटें एक दूसरे से टकराती हैं।  वहां भूकंप का खतरा पैदा हो जाता है।  भूकंप तब आता है जब इन प्लेट्स एक दूसरे के क्षेत्र में घुसने की कोशिश करती हैं, प्लेट्स एक दूसरे से रगड़ खाती हैं, उससे अपार ऊर्जा निकलती है, और उस घर्षण या फ्रिक्शन से ऊपर की धरती डोलने लगती है, कई बार धरती फट तक जाती है, कई बार हफ्तों तो कई बार कई महीनों तक ये ऊर्जा रह-रहकर बाहर निकलती है और भूकंप आते रहते हैं, इन्हें आफ्टरशॉक कहते है।