गोपालगंज में अधूरा नाला बना जानलेवा, ठेकेदार की लापरवाही से लोग परेशान मुजफ्फरनगर में एक ही परिवार के 4 लोगों की संदिग्ध मौत, सामूहिक आत्महत्या की आशंका ई आईपीएस बनेगा.., अनंत सिंह ने छोटे बेटे को लेकर बताई दिल की ईच्छा, अभिनव ने दिया यह जवाब ई आईपीएस बनेगा.., अनंत सिंह ने छोटे बेटे को लेकर बताई दिल की ईच्छा, अभिनव ने दिया यह जवाब फोटो से बनाई अश्लील रील… फिर शुरू हुआ ब्लैकमेल का खेल, 5 लाख और गहनों की मांग से दहशत में महिला नालंदा हादसे पर VIP चीफ मुकेश सहनी ने जताया दुख, घटना के लिए प्रशासनिक कुव्यवस्था को बताया जिम्मेवार नालंदा हादसे पर VIP चीफ मुकेश सहनी ने जताया दुख, घटना के लिए प्रशासनिक कुव्यवस्था को बताया जिम्मेवार सीने पर हाथ लगाया, कपड़े फाड़े फिर… बिहार में महिला के साथ शर्मनाक हरकत; दो आरोपी गिरफ्तार 1 अप्रैल से पूरे बिहार में अतिक्रमण हटाओ अभियान: नो मैन्स लैंड पर होगा विशेष फोकस, सरकार ने जारी किए सख्त निर्देश 1 अप्रैल से पूरे बिहार में अतिक्रमण हटाओ अभियान: नो मैन्स लैंड पर होगा विशेष फोकस, सरकार ने जारी किए सख्त निर्देश
23-Apr-2023 07:38 PM
By First Bihar
PATNA: राजधानी पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने खुले मंच से कहा कि वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक करियर को मिट्टी में मिला देंगे। सम्राट के इस बयान पर खुद मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया आई और उन्होंने सम्राट चौधरी को जवाब देते हुए कहा कि वे अगर कह रहे हैं कि मिट्टी में मिला देंगे तो मिला दे। इसको लेकर बिहार में सियासत तेज हो गई है। अब RLJD के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने इसको लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तीखा तंज किया है।
उपेंद्र कुशवाहा ने कहा है कि मिट्टी में मिला देने की बात सिर्फ सम्राट चौधरी ने नहीं कही है बल्कि नीतीश कुमार खुद अपने बारे में बोलते रहे हैं कि मिट्टी में मिल जाएंगे लेकिन ये काम नहीं करेंगे। राजनीति की डिक्सनरी में खुद नीतीश कुमार ने इस शब्द का इस्तेमाल किया है। आज अगर उनके बारे में कोई इस शब्द को इस्तेमाल कर रहा है तो दर्द क्यों हो रहा है। नीतीश कुमार को खुद ही सोंचना चाहिए कि उन्होंने जब उस शब्द को इस्तेमाल किया था, खुद उन्हें उस बात को कहना चाहिए था कि नहीं कहना चाहिए था।
कुशवाहा ने कहा कि नीतीश कुमार क्या काम करते हैं अब उन्हें खुद ही एहसास हो रहा होगा। उसी एहसास का परिणाम है कि 17-18 साल पहले मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने तुरंत शिक्षक बहाली की प्रक्रिया शुरू की और अब खुद उसे बदल दिया। बदलना जरूरी था यह बात ठीक है लेकिन इतने दिनों को बाद उन्हें इस बात का एहसास कैसे हुआ। उन्हें अब एहसास हुआ कि इस तरह से शिक्षकों को बहाल करेंगे तो शिक्षा व्यवस्था चौपट हो जाएगी। अब जाकर अपनी गलती को सुधार रहे हैं लेकिन इतने दिन में जो व्यवस्था चौपट हो गई उनके निर्णय के कारण, इस बात का एहसास तो खुद उनको करना चाहिए। नीतीश कुमार खुद अपनी गलती को सुधार लें और जितना प्रचार करना हो करते रहें।